अहंकार का जन्मदाता अज्ञान है प्रमाण सागर महाराज ।
पारसनाथ
पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने उत्तम मार्दव धर्म पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा मार्दव का अर्थ है मृदुता उन्होंने अहंकार को हटाने पर जोर दिया इस पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा की अहम को पहचान। मैं कुछ हु यह अहंकार है। मैं हु तो यह अध्यात्म है। मैं बड़ा आदमी हु, मै पदाधिकारी हु। यह अहंकार है। उन्होनें कहा हमने काल्पनिक छवि को अपना मानने के तैयार कर लिया है। मनुष्य सामान्य रहना नही चाहता। यह सब अहंकार की परिणति है। हमे अहम से उठकर अरहम तक जाना है। अहंकार तो अपने को बड़ा मानना, छोटा महसुस करना भी अहंकार है। हीनता अभिमान सब दुर्बलता है। सब बराबर है।
उन्होंने एक गाथा के माध्यम से बताया
मैं सुखी दुखी में रंक राव, मेरे ग्रह गोधन प्रभाव,मेरे सूत में सबल दीन,बेरूप सुभग मुरख प्रवीण
उन्होंने कहा अगर अहंकार को पहचान लिया तो जीवन बदल जाएगा।अहंकार का जन्मदाता अज्ञान है। काल्पनिक अस्तित्व को अपना मानना अहंकार है। भेद विज्ञान को पहचानो,जब समानता की अनुभूति होती है अहंकार खत्म हो जाता है। यह सम्पति मेरी, संपर्क मेरा, मेरा काम मेरे है यह भ्रम आपने पाला है। मैं पन के कारण मेरे पन का तिरस्कार कर देता है। यह तुमने भ्रम पाला हुआ है यह शरीर कुछ नही, तन पे तुम्हारा अधिकार नही जिस दिन यह भ्रम टूट जाएगा तुम्हारा अहंकार खत्म हो जाएगा।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
