तरुण साग़र महाराज विचारों के भी तरुण थे



एक ऐसा युवा जो सचमुच एक पवन के वेग की तरह ज़न कल्याण की भावना औऱ उसे कार्य रूप लाने को कटिबद्ध रहा है जी हम बात कर रहे है उन व्यक्तित्त्व की जो पवन से पूज्य मुनि श्री तरुण साग़र बने जो सचमुच तरुण थे उन्हें अहिसा महाकुंभ को लालकिले की प्राचीर से कर दिखाने का कार्य किया गीतकार रवींद्र जैन ने कहा इस तरुण तपस्वी ने छेड़ा आहवान अहिंसा का अहिंसा महाकुंभ से धर्म की हो प्रभावना यह वो व्यक्तित्व थे जो साधना संयम के पद पथ पर चलते हुए इनके द्वारा लिखी गयी कृति कड़वे प्रवचन ने न जाने कितनो के ह्रदय को परिवर्तित कर दिया। यह एक ऐसे पहले सन्त थे जिन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी अगर दिल्ली जाए तो तो बहुत उत्तम होगा। आज वो वाक्य सार्थक रूप दर्शाता है। क्या नेता,क्या अभिनेता सब आपके आगे नतमस्तक थे। सेना के जवानों के बीच जाकर उन्हे उदबोधन देना कोई बिरला सन्त ही कर सकता है। उनके गुरु पुष्पदन्त सागर महाराज ने जो नाम दिया तरुण साग़र वो सचमुच सार्थक हुआ आपने तरुणों में तरुण क्रांति को लाकर उन्हें संस्कारित किया।
मेरा अनुभव
पूज्य मुनि श्री तरुण सागर महाराज 1996 में रामगंजमंडी की धरा पर उनका आगमन हुआ उनकी आगवानी कमल फिलिंग स्टेशन पर हुई। वहा जो भक्तो का रेला और नगर आगवानी थी वह अभूतपूर्व थी। पूज्य गुरुदेव ने जिनालय के दर्शन किये और अभिभूत हुए उन्होंने अपना उदबोधन दिया वह उदबोधन क्रांति से ओत प्रोत था। जब नगर के प्रमुख चोराहो पर उनका प्रवचन होता था बाजार बंद हो जाते थे लोग बस उन्हें ही सुनते थे। उनके साथ उनके समीप रामगंजमंडी से कोटा तक पदयात्रा में शामिल होने का अवसर मिला सचमुच मेरे जीवन के अनुपम क्षणों में से एक रहे। आपके साथ उस समय प्रज्ञासागर महाराज भी साथ थे वही आपकी निश्रा में एक आध्यात्मिक कवि सम्मेलन भी हुआ।आपकी कविता रे चपलमन कर तु अरिहंत का भजन प्रचलित थी।
गुरुदेव का एक सपना था जो कारगर रूप ले रहा है
गुरुदेव के गगन चुम्बी सपनों में से एक सपना यह भी था की “क्षमावाणी पर्व” हो राष्ट्रीय क्षमावाणी पर्व” इसलिए उनके चतुर्थ महाप्रयाण (समाधि) दिवस को ” तरुण क्षमा पर्व” के रूप में मनाया जा रहा है. जिसे देश के 4 राज्यों में राज्य सरकार द्वारा व राजस्थान के राजभवन में महामहिम श्री कलराज जी मिश्रा द्वारा दीप पुष्पांजलि के साथ मनाया जायेगा | –
एक नज़र पवन से मुनि श्री तरुण सागर महाराज के सफ़र पर
पूज्य मुनि श्री का जन्म सन 1967 में मध्य प्रदेश के दमोह जिले के एक गांव में हुआ था। उनका वास्तविक नाम पवन कुमार जैन था। जैन संत बनने के लिए उन्होंने 13 वर्ष की उम्र में 8 मार्च 1981 को घर छोड़ दिया था।
मुनि तरुण सागर ने 20 साल की उम्र में दिगंबर मुनि दीक्षा ली।
तुम भी भगवान् बन सकते हो यह सुन वैराग्य का ज्वर उठा
जब पवन छठंवी कक्षा मे अध्यन रत थे वह जलेबी के शोकींन थे और स्कूल से लोटते वक्त वह जलेबी खा रहे थे उनके कानो मे एक गूंज आई वह गूंज थी आचार्य श्री पुष्पदंत सागर महाराज के प्रवचनों की वह गूंज थी कि तुम भी भगवान बन सकते हो, यह बात उनके कानों में पड़ी और यह सुन उनके जीवन मे संत बनने का ज्वर उठा और दीक्षा लेकर मुनि तरुण सागर महाराज बन गए और जन जन को कल्याण का मार्ग प्रदान किया ऐसे महासंत सदा सदा युगों तक जीबंत रहेगे।’
अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
