छुटे बिना कल्याण नही मुनि श्री शुद्धसागर
रावतभाटा
श्रमण मुनि श्री 108 शुद्धसागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि चोरी हिंसा है, चोरी करने वाले को हिंसा पाप का बंध होता है। जो चोरी करता है उसके व्रत एवं नियम निष्फल हो जाते हैं। जो वस्तु हमें किसी द्वारा नहीं दी गई है हमने उसे ग्रहण किया है तो हमें चोरी का दोष लगता है। मुनि श्री ने कहा हमें दूसरे की गिरी पड़ी वस्तु को ग्रहण नहीं करना चाहिए और ना ही उसका दान करना चाहिए। हमेशा निज वस्तु का दान करना चाहिए। दूसरे की वस्तु का नही। हमे पहले स्वयं की संपत्ति को ठिकाने लगाना है, दूसरे की नहीं। उसके बारे में विचारना ही नहीं है। जीव संसार के बंधन में फंसा हुआ है, घर उसका कारागृह है, उसकी देवी उसकी बेड़ी है।घर पर रहकर आज तक किसी का कल्याण नहीं हुआ है। आत्म ब्रह्म ही सत्य है।
इसको जाने बिना किसी का कल्याण संभव नहीं है।
मुनि श्री ने आगे कहा कि संसार में सभी फंसाने वाले हैं, छुड़ाने वाले मात्र गुरु है। इसीलिए सत्य को जानने के बाद ही आनंद आएगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
