धैर्य से समस्त कार्य आसान होते हैं, संसार के महापुरुषों ने धैर्य के द्वारा जीने की कला सिखाई है आर्यिका विज्ञाश्री
निवाई
भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में निवाई शहर में चल रहे 48 दिवसीय जिन सहस्त्रनाम महामंडल विधान में अनेक धार्मिक आयोजन किऐ जा रहे हैं।

जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि कार्यक्रम में प्रातः अभिषेक, शांतिधारा, अष्टद्रव्यों पूजा के बाद विधान मंडल की पूजा हुई। जिसमें पदमचन्द, राजेन्द्र कुमार सांवलियाँ जैन परिवार ने पूजा अर्चना कर पुण्यार्जन प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंतर्गत आर्यिका श्री ने भरी धर्म सभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि धीरज एक ऐसी पारसमणी है जो हर व्यक्ति को अपने लक्ष्य की ओर सबसे महत्वपूर्ण परिणामों से परिपूर्ण कर सकती है, धैर्य से समस्त कार्य आसान् होते हैं, लेकिन इस पर गहरी आस्था आवश्यक है, धर्म की तरलता धैर्य से संभव हुई है। इसलिए इसका आध्यात्मिक अवयव गति प्रदान करता है, धैर्य से शक्ति का संचय होता है। यह संचय अनेक प्रयासों से भी संभव नहीं हो सकता, वह धैर्य के कारण सहज बन जाता है। यदि जीवन में इसके प्रयोग की तकनीक विकसित करके एक आधार निर्मित किया जा सके तो वह नयी उपलब्धि का हेतु बन सकता है। संसार के महापुरुषों ने धैर्य के द्वारा जीने की कला सिखाई है।

उन्होंने इससे अपने जीवन को अद्भुत आकार दिया और करोड़ो लोगों को समुचित दिशा दी है, अनेक प्रकार के प्रकोपों से बचने के लिए, दुःख-दर्द के निवारणार्थ धैर्य बिल्कुल सही निदान प्रस्तुत करने में समर्थ है, एक वाक्य में व्यक्त किया जा सके, तो कहा जा सकता है कि धैर्य से सब कुछ पाया जा सकता है धैर्य या सहनशीलता को कमजोरी समझना बहुत बड़ी भूल है , धैर्य पलायन नहीं है और न ही उसे पलायन का परिचायक बनने देना और न ही उसे पलायन का परिचायक बनने देना चाहिए यह तो वह शक्ति है जो तमाम बिगड़े कामों को बना देती है। धैर्य सदैव विवेक का साथ देता , जीवन में कितनी भी विषम परिस्थितियां आए हम धैर्य साथ न छोड़े। इसी में सफलता छिपी है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
