प्रभु भक्ति के लिये भावों की निर्मलता और श्रद्धा जरूरी है ,धार्मिक प्रतियोगिताएं एवं परीक्षायें पुरस्कार के लिए नहीं ज्ञानवर्धन के लिए होती हैं:,विशुद्धमती माताजी गणधर वलय स्तोत्र की परीक्षा में रचना पाटनी को प्रथम पुरस्कार मिला

JAIN SANT NEWS ग्वालियर

प्रभु भक्ति के लिये भावों की निर्मलता और श्रद्धा जरूरी है 

धार्मिक प्रतियोगिताएं एवं परीक्षायें पुरस्कार के लिए नहीं ज्ञानवर्धन के लिए होती हैं:विशुद्धमती माताजी

गणधर वलय स्तोत्र की परीक्षा में रचना पाटनी को प्रथम पुरस्कार मिला

ग्वालियर,

बिना भावों के कोई कार्य फलित नहीं होता! जब ईश्वर की आराधना या आत्म साधना करना हो तो भावों की निर्मलता और श्रद्धा का होना जरूरी है! कोई भी धार्मिक प्रतियोगिता या परीक्षा हो, वह पुरस्कार पाने के लिए नहीं ज्ञानार्जन के लिए होती है। गणधर वलय स्तोत्र की परीक्षा भी सभी प्रतिभागियों को ज्ञान देने वाली थी। इसमें पुरस्कार पाना उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना इससे मिला ज्ञान है। इसलिए जो प्रतिभागी पीछे रह गए, उन्हें निराश नहीं होना है, बल्कि और तैयारी करना चाहिए। इस परीक्षा से प्राप्त ज्ञान आपके जीवन में काम आएगा। ये सम्यक दर्शन की निशानी है। इससे आपकी आत्मा की प्रभावना होगी। यह उदगार सिद्धांत रत्न गणिनी आर्यिकाश्री विशुद्धमती माताजी ने बुधवार को गणधर वलय स्तोत्र परीक्षा के पुरस्कार वितरण समारोह में व्यक्त किए।

गुरु मां ने सेमिनार के सफल आयोजन के लिए पट्ट गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमती माताजी को साधुवाद देते हुए कहा कि माताजी जैन धर्म की अदभुत प्रभावना कर रही हैं। उन्होंने वह दुश्कर कार्य किया है, जिसकी कल्पना नहीं कि जाती। माताजी ने लगातार 11वां सफल आयोजन कर बेहद सराहनीय कार्य किया है। गुरु मां के आशीर्वचनों पर विज्ञमती माताजी ने कहा कि गुरु मां के आशीर्वाद और वात्सल्य भाव से ही ये सेमिनार सफल हो सका।

इनका हुआ सम्मान

इ अवसर पर जैन समाज के प्रवक्ता ललित जैन “भारती”, प्रथम पुरस्कार के प्रायोजक अशोक पहाड़िया कोटा, द्वितीय पुरस्कार के प्रायोजक राजमल पाटौदी, धर्मपत्नी तरुलता व उनके परिजन, आगरा से आए चक्रेश जैन व सुरेश जैन, पंडित डॉ. अभिषेक जैन दमोह, सेमिनार संयोजक पंकज बाकलीवाल, विजय कासलीवाल, सचिन जैन मुरार, मोनिका सेठी, ममता जैन वैक्सीन, मंजू जैन, सोनल जैन, सोनाली टोंग्या, दीपिका जैन तथा संघस्थ्य रौनक भैया का चातुर्मास कमेटी द्वारा सम्मान कर स्मृति चिन्ह भेंट किए गए।

इन्हें मिले पुरस्कार

गणधर वलय स्तोत्र की परीक्षा में प्रथम रहीं रचना पाटनी पुरस्कार प्रायोजक अशोक पहाड़िया कोटा ने, द्वितीय स्थान पर रहीं कु. काकुल जैन को इस पुरस्कार के प्रयोजक राजमल पाटौदी ने एवं तीसरे स्थान पर रहीं कु. अंशिका जैन आगरा को चातुर्मास कमेटी के सदस्यों ने पुरस्कृत किया। इन्हें क्रमशः 1 किलो, 750 ग्राम व 500 ग्राम शुद्ध चांदी के पूजन सेट पुरस्कार के रूप में दिए गए।

इन्हें मिले विशेष सांत्वना पुरस्कार

इस परीक्षा में 7 सांत्वना पुरस्कार दिए गए। ये पुरस्कार प्राची जैन, सिद्धांत जैन, आकांक्षी जैन, भावना जैन, वैशाली जैन, नविता पाटनी व आयुष जैन को दिए गए।

दस सामान्य सांत्वना पुरस्कार भी दिए

ये पुरस्कार रंजना हाईकोर्ट, राहुल आनंदनगर, प्रीति पाटनी, रेणु छाबड़ा, विकास कासलीवाल प्रियंका, सीमा राहुल जैन, सिद्धार्थ जैन विनयनगर, राखी सोनी, दिनेश जैन मुरार और मोनिशा कागदी को दिए गए। इनके अलावा अन्य प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया गया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी

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