भावी दीक्षार्थियों ने श्री गणधर वलय विधान की पूजन की
श्री महावीर जी
प्रथमाचार्य चारित्र आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज के तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्मसागर जी महाराज श्री से वर्ष 1969 में दीक्षित पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महारा की मुनि दीक्षा तथा आर्यिका 105 श्री गुणमति माताजी जी की जन्म नगरी अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी मे आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी चातुर्मास कमेटी के तत्वाधान में 4 अगस्त 2022 को दो दीक्षाएं होगी ।

चातुर्मास समिति अध्यक्ष श्री राजकुमार सेठी जयपुर ने बताया

1 अगस्त को श्री महावीर विधान
2 अगस्त को आचार्य श्री वर्द्धमान सागर विधान तथा 3 अगस्त को दीक्षार्थी श्रीमती धीसी देवी जी 79 वर्ष दादी जोबनेर तथा श्रीमती भगवानी देवी जयपुरिया नानी सीकर 74 वर्ष द्वारा वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज संघ आर्यिका 105 श्री सरस्वती मति माताजी एवम आर्यिका 105 श्री




सृष्टिभूषण माताजी संघ सानिध्य में श्री गणधर वलय का पूजन किया गया। भट्टारक श्री सकल कीर्ति जी द्वारा रचित श्री गणधर वलय मंडल विधान की सुंदर रचना संघस्थ श्री गजु भैया पूनम दीदी नेहा दीदी दीप्ति दीदी साधना दीदी ने की श्री गणधर वलय के प्रथम वलय में 8, दितीय वलय में 16 तथा तृतीय वलय में 32 कुल 48 अर्ध्य दीक्षार्थियों द्वारा भक्ति भाव पूर्वक चढ़ाए गए। आचार्य श्री द्वारा चढ़ाए गए अर्घ का गुण और महत्व बताया गया।इस विधान के पूजन की पात्रता केवल दीक्षार्थियों को होती है।
श्री गणधर वलय विधान के पूर्व नित्य नियम पूजन की गई दीक्षा समारोह में शामिल होने के लिए परिजन जोबनेर तथा सीकर समाज के अतिरिक्त निकटवर्ती नगरों तथा अन्य राज्यो से भक्तगण श्री महावीर जी आये है
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
