जब संसार के दुःखों से भर जाओ तो अपने प्रभु की शरण में जाना, तुम्हारे दुःखों का निराकरण हो जाएगा
जब कोई रास्ता न दिखे तब भगवान की शरण में जाओ:माताजी

नगर की महापौर ने पूज्य माताजी के चरणों मे शीश झुकाकर लिया आशीर्वाद महापौर को पद की गरिमा को अनंत ऊंचाइयों तक पहुंचाने का माताजी ने दिया आशीर्वाद
ग्वालियर,
हम जिन्हें अपनी आंखों से नहीं देख पाते, वह उन तीर्थंकरों के रास्ते पर चल रहे हैं, हमें रास्ता दिखा रहे हैं, जो दुःखी हैं। जब संसार के दुःखों से भर जाओ तो अपने प्रभु की शरण में जाना, तुम्हारे दुःखों का निराकरण हो जाएगा। यह उदगार पट्ट गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमती माताजी ने मंगलवार को चम्पाबाग बगीची में चल रहे गणधर वलय स्तोत्र सेमिनार में व्यक्त किए।
माताजी ने कहा कि जो चलते हुए भी नहीं चलते, देखते हुए भी नहीं देखते, बोलते हुए भी नहीं बोलते, ऐसे परम योगी नमस्कार के योग्य होते हैं। उन्हें देव भी नमस्कार करते हैं। जो दुनिया में पूज्यनीय होते हैं, वह अरिहंत पुत्र घोर गुणों के धारक होते हैं। वह अर्चना के योग्य होते हैं, वह घोर पराक्रम धारी हैं। वह श्रेष्ठ ब्रह्मचर्य से युक्त होते हैं।

संसारी व्यक्ति सर्वगुण संपन्न नहीं
माताजी ने बताया कि मोक्षमार्ग पर चलने वाले गणधर स्वामी देवों द्वारा वंदनीय हैं। संसारी व्यक्ति सर्वगुण संपन्न नहीं हो सकते। ये तो गणधर ही हो सकते हैं। हम शक्तिहीन, अल्पज्ञ, चंद गुणों के धारी हैं। गणधर परम गुणधारी होते हैं। हम उनकी स्तुति, वंदना, अर्चना करते हैं। माताजी ने बताया कि जो जितना लबालब भरा होता है, वह उतना ही शांत रहता है। गणधर जहां भी विराजमान होते हैं, वहां सब सकुशल होता है।
महापौर पद की गरिमा को अनंत ऊंचाइयों तक पहुंचाने का माताजी ने दिया आशीर्वाद


जैन समाज के प्रवक्ता ललित जैन ने बताया कि सेमिनार में पहुंचीं नव निर्वाचित महापौर डॉ. शोभा सतीश सिकरवार ने पार्षद प्रेमलता जैन, अनिल सांखला, श्रीमती तिवारी के साथ सिद्धांत रत्न गणिनी आर्यिकाश्री विशुद्धमती माताजी, पट्ट गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमती माताजी ससंघ के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद लिया। चातुर्मास समिति ने सभी का सम्मान किया। इस अवसर पर आर्यिकाश्री विज्ञमती माताजी ने शोभा सिकरवार को आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह सम्मान इसलिए दिया जा रहा है कि आप महापौर पद की गरिमा को अनंत ऊंचाइयों पर पहुंचाएं और न्याय व नीति के सिद्धांत का पालन करते हुए शहर के विकास के नए आयाम स्थापित करे। साथ ही जैन समाज को सहयोग करती रहें। माताजी ने कहा कि शोभा सिकरवार उत्कृष्ट कार्य कर कल इससे भी उच्च पद पर पहुंचें। इस मौके पर महापौर ने गणधर वलय स्तोत्र सेमिनार के लिए 11 हजार रुपए की सहयोग राशि देने की घोषणा की।
भगवान महावीर और जैन दर्शन से प्रभावित हूं:शोभा

इसअवसर पर महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि एक माह से परम पूज्य गणिनी आर्यिकाश्री विशुद्धमती माताजी अपने संघ के साथ ग्वालियर में ज्ञान की गंगा बहा रही हैं। महापौर ने कहा कि मेरा जैन धर्म से बचपन से ही जुड़ाव रहा है। जैन धर्म भगवान महावीर के जिओ और जीने दो के सिद्धांत का पालन कर अहिंसा के मार्ग पर चल रहा है। मैं भगवान महावीर और जैन दर्शन से काफी प्रभावित हूं। हम सभी को भगवान महावीर के सत्य और अहिंसा के सिद्धांत का अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने ग्वालियरवासियों को भरोसा दिलाया कि ग्वालियर के विकास में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। इसके लिए सभी के सहयोग और आशीर्वाद की जरूरत है। चातुर्मास समिति ने महापौर और सभी पार्षदों को स्मृति चिन्ह भेंट किए
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
