अज्ञानता में हिंसा और जानकारकी गई हिंसा में अंतर है
साग़र
– जानकर की गई हिंसा और अज्ञानता में हुई हिंसा में अंतर है। संकल्प पूर्वक किया गया पाप जन्म जन्म तक रुलाता है,हमने महाभारत में देखा कि पहले के लोग कषाय करते थे, जब युद्ध करते थे एक दूसरे को मारने को तैयार रहते थे। लेकिन जब शाम को युद्ध समाप्त हो जाने पर एक दूसरे के दुख दर्द को पूछते पाए जाते थे। लेकिन हम आज कल 24 घंटे हिंसा करते हैं लेकिन हम एक दूसरे के काम नहीं करते। एक को भी मारते नहीं लेकिन कषाय जिंदगी भर की पालें रखते हैं।पहले लोग सुबह क्रोध किया दिन में युद्ध किया शाम को एक दूसरे के दुख मिटाते हुए मिलते थे। इनको तीव्र कषाय नहीं होती थी आज तो आपके चुनाव ही कषाय का कारण बन गये। यह उद्गार सागर में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि पुंगव श्री सुधासागर महाराज ने व्यक्त किए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
