स्मृति 2016 उद्बोधन कुण्डलपुर मोक्ष मार्ग में कोई क्षमा नहीं : आचार्यश्री
कुण्डलपुर
काया नाश करने योग्य है। लेकिन बाहरी काया को नाश नहीं किया जाता।
है। मोक्ष मार्ग में कोई भी क्षमा नहीं। यह बात आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा- संयमित होकर धर्म कार्य व्यवस्थित करना है। थोड़ी सी असावधानी न हो। संयम के कारण मनुष्य गति को देव गति से महत्वपूर्ण कहा गया है। आर्चाश्री ने कहा- आज श्रुत पंचमी है। आप लोग बहुत संख्या में आकर इस उत्सव को सानंद संपन्न करा रहे हैं। एक चित्र मंदिरों में देखने मिलता उसके पीछे क्या धारणा है प्रत्यक्ष दृश्य नहीं होता, परोक्ष रूप में देख सकते। उस चित्र को देखो तो वह दृश्य आंखों में झलकता है। आज भी यह दृश्य दृश्य विद्यमान है फिर भी ज्ञान के द्वारा नहीं देख पाते। इस कारण को जिसने पूर्णतः नष्ट किया, नश्वर है यह काया। आपने इन पांच दिनों में मन, वचन, काय से इस अनुष्ठान का आराधन किया भविष्य के लिए पुण्य कर्म का बंधन किया। आचार्य श्री ने कहा उपस्थित जन समुह को हम पीछे से देखना प्रारंभ करते हैं, देखते देखते आगे बैठने वालों को बाद में देखते हैं, पीछे बैठने वाले को स्थान
पहले आता, आगे बैठने वालों का बाद में। आगे बैठने वालों से ज्यादा पुण्य बंध पीछे बैठने वालों को मिलेगा। हमारे यहां भाव प्रधान समूह कार्य में समूह को ही श्रेय जाता है अकेले एक व्यक्ति को नहीं।
संकलित अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
