महान सौभाग्य को देता हुए स्वर्णिम युग का हुआ विहार

JAIN SANT NEWS गलियाकोट

महान सौभाग्य को देता हुए स्वर्णिम युग का हुआ विहार

गलियाकोट

गलियाकोट पुनर्वास कॉलोनी श्री समाज जिसके असीम पुण्य की विश्व की समस्त जैन समाज व अनेकानेक साधु भगवन्त भी ह्रदय से अनुमोदना करते है

कोरोना का विकट विगत दो वर्ष सन मार्च 2020 से सन 2022 जून तक के समयावधि में समाज के प्रत्येक परिवार ,प्रत्येक बाल गोपाल व पूरी मुनि संघ सेवा समिति ने वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरूराज संघ की ज्ञान-ध्यान तपो साधना का भरपूर लाभ प्राप्त किया।

आचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरूराज के चरण नगर में पड़ना,उनकी आहार साधना होना अर्थात 300 से अधिक सन्तो के चरण नगर में पड़ने व आहारदान होने के समान है,क्योकि पूज्य आचार्य श्री 300 से अधिक सन्तो के शिक्षागुरु है,वर्तमान में सेकड़ौ सन्त अपने प्रवचन से लेकर 6 प्रकार के स्वाध्याय की शुरुवात आचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरुदेव के जयघोष से करते है

*किसी नगर में पूज्य आचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरूराज का स्वाध्याय तप का होना अर्थात जैन दर्शन-विज्ञान व आध्यात्म के साक्षात विश्वविद्यालय की स्थापना व श्रुत देवता का जीवंत रूप में विद्यमान होने के समान है*

अंतरंग तपस्वी आचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरूराज की सेवा अर्थात विश्व गौरव आचार्य श्री दशभूषण जी,वात्सल्यरत्नाकर आचार्य श्री विमलसागर जी,श्वेतपिच्छाचार्य श्री विद्यानन्दी जी,गणधराचार्य श्री कुंथुसागर जी,अभिक्ष्णज्ञानोपयोगी आचार्य श्री अभिनन्दन सागर जी व मर्यादा शिष्योत्तम आचार्य श्री भरत सागर जी जैसे षट महाऋषियों की सेवा करना है क्योंकि इन षट ऋषियों ने इनकी विलक्षण क्षमता को जानकर इन्हें कलिकाल अकलंक व सिद्धान्त चक्रवर्ती की उपमा से अलंकृत करते हुए सदैव ज्ञानियों की अग्रिम पंक्ति में रखा।

ऐसे कालजयी महाज्ञानी सन्त की 26 माह तक इस दृढ़ संकल्प के साथ सेवा वैयावृत्ति करना कि जब तक कोरोना प्रकोप शांत नही होता तब तक हम गुरु संघ को अपने नगर से कही अन्यत्र विहार नही करने देंगे साथ ही समर्पित भाव से दिगम्बर गुरुओ की सेवा करना वाकई में न सिर्फ विश्व जगत, न सिर्फ देव जगत अपितु सन्त जगत भी इसकी अनुमोदना व प्रशंसा कर रहे है।

एक समाज के तौर पर पहली बार ये अनुभव किया है कि 26 माह के प्रवास में भी आचार्य श्री संघ द्वारा प्रतिज्ञापूर्वक होर्डिंग,बोर्डिंग, आडम्बर,बड़े बड़े मंच ताम झामो व निमंत्रण पत्रिकाओं तक का पूर्ण निषेध था। गुरुदेव संघ द्वारा जब किसी भी प्रकार का भौतिक निर्माण व अनावश्यक व्यय ही नही तो बोली जैसी कुप्रथा का भी निषेध रहा,कलश स्थापना से लेकर,पिच्छिका परिवर्तन सब सेवाभावी श्रावको या स्वेच्छिक दानियो को दिया गया

गलियाकोट पुनर्वास कॉलोनी दिगम्बर जैन समाज के इस अथाह पुण्य को शब्दों में पिरोना असम्भव है लेकिन भविष्य में इस नगर की जैन समाज के विकास व पुण्य फल को हम निश्चित तौर पर अनुभव करेंगे।

पूज्य गुरुदेव संघ का 8 जून की प्रातः शुभ वेला में योगेन्द्रगिरी सागवाडा के लिए मंगल विहार हुआ

स्वाध्याय तपस्वी वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनन्दी जी गुरूराज के श्री चरणों मे अविनाशी नमन

शब्दसुमन-शाह मधोक जैन चितरी
नमनकर्ता-गुरुभक्त परिवार

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