जितना ऊंचा उठना है त्याग करना ही पड़ेगा निष्कंप सागर महाराज
देवरीकला
पूज्य मुनि निष्कंप सागर महाराज ने ज्ञान विद्या शिक्षण शिविर के शुभारभ पर उदबोधन मे कहा अनादिकाल से आत्मा ने केवल दुख ही दुख पाया है, सुख को आत्मा ने किंचित मात्र भी प्राप्त नही किया है। इसके कारण पर प्रकाश डालते हुए कहा इसका एक मात्र ही कारण है मिथ्यात्व और राग द्वेष है। ये शरीर कभी अपवित्र नहीं है। इसके होते हुए तो आत्मा का कल्याण हो सकता है परन्तु राग द्वेष आदि के होते हुए इस जीव व आत्मा का कभी कल्याण होगा नहीं।
कही मार्मिक उदाहरण के माध्यम से मुनि श्री ने बताया की यदि तिल में तेल न हो तो कभी उसकी पिराई न हो और इस आत्मा में राग द्वेष न हो तो इसे चतुर्गति में भटकना न पड़े। चतुर्गति के भ्रमण से बचना चाहते हो तो राग द्वेष का परिहार करो। ।
मुनि श्री ने आगे कहा की इस संसार में जितनी भी वस्तु प्राप्त करना है, त्याग के बल पर ही प्राप्त होगी जितना ऊंचा उठना है त्याग करना ही पड़ेगा कुंआ पानी का त्याग करता है। गाय दूध का त्याग करती है सुखी रहती है। सुखों का अनुभव करना है तो इस प्रकार हम भी त्याग करना होगा। तब जाकर यह आत्मा परमात्मा बन पाएगी।
संकलन अभिषेक जैन लूहाडीया रामगंजमंडी
