मुसीबत में फंसे व्यक्ति की मदद करना चाहिए, भविष्य में अच्छे परिणाम मिलते हैं आर्यिका विज्ञाश्री
टोंक
प. पू.भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ का टोंक में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। सीमा पर शहर वासियों ने बेन्डबाजों से भव्य आगवानी कर जयकारों के साथ मंदिर जी पर पाद प्रक्षालन कर आरती करके नसियां जी में ठहराया। राजाबाबु गोधा ने बताया की कार्यक्रम में दूर – दूर की कॉलोनियों से भक्तगण गुरु माँ की अगवानी के लिए पहुंचें । मंदिर जी में गुरु माँ के मुखारविंद से अभिषेक , शांतिधारा हुई , कार्यक्रम में नैनवा , नगरफोर्ट , सोनवा आदि स्थानों से आये अतिथिगणों का समाज द्वारा भव्य सम्मान किया गया। उसके पश्चात पूज्य माताजी ने मंगलमय उद्बोधन देते हुये कहा कि – सभी को मुसीबत में एक – दूसरे की मदद करना चाहिए, चाहे वो अपना हो या फिर पराया। हममे मानवता होनी ही चाहिए।
क इंसान बनने से इंसानियत नहीं आती, बल्कि दिल मे दया रखना , एक – दूसरे के दर्द को समझना, इन सबसे इंसानियत पैदा होती है। आर्यिका श्री ने कहा कि एक समय की बात है। एक जंगल में नदी किनारे एक पेड़ पर कबूतर रहता था, उसी जंगल में एक दिन कहीं से एक मधुमक्खी भी गुजर रही थी कि अचानक से वह एक नदी में जा गिरी उसके पंख गीले हो गए। उसने बाहर निकलने के लिए बहुत कोशिश की, लेकिन वह नहीं निकल सकी। जब उसे लगा कि वह अब मर जाएगी, तो उसने मदद के लिए चिल्लाना शुरू कर दिया। तभी पास के पेड़ पर बैठे कबूतर की नजर उस पर पड़ गई, कबूतर ने उसकी मदद करने के लिए तुरंत पेड़ से उड़ान भर ली।
कबूतर ने मधुमक्खी को बचाने के लिए एक तरकीब सोची कबूतर ने एक पत्ते को अपनी चोंच में पकड़ा और उसे नदी में गिरा दिया। वह पत्ता मिलते ही मधुमक्खी उस पर बैठ गई। थोड़ी ही देर में उसके पंख सूख चुके थे। अब वह उड़ने के लिए तैयार थी। उसने कबूतर को जान बचाने के लिए धन्यवाद बोला। उसके बाद मधुमक्खी वहां से उड़कर चली गई।इस बात को कई दिन बीत चुके थे। एक दिन वही कबूतर गहरी नींद में सो रहा था और तभी एक लड़का उस पर गुलेल से निशाना लगा रहा था। कबूतर गहरी नींद में था, इसलिए वह इस बात से अंजान था, लेकिन उसी समय वहां से एक मधुमक्खी गुजर रही थी, जिसकी नजर उस लड़के पर पड़ गई यह वही मधुमक्खी थी, जिसकी कबूतर ने जान बचाई थी। मधुमक्खी तुरंत लड़के की ओर उड़ गई और उसने जाकर सीधे लड़के के हाथ पर डंक मार दिया। मधुमक्खी के काटते ही लड़का तेजी से चिल्ला पड़ा। उसके हाथ से गुलेल दूर जाकर गिरी। लड़के के चिल्लाने की आवाज सुनकर कबूतर की नींद खुल गई थी। वह मधुमक्खी के कारण सुरक्षित बच गया था। कबूतर सारा माजरा समझ गया था। उसने मधुमक्खी को जान बचाने के लिए धन्यवाद बोला,और दोनों जंगल की ओर उड़ गए। हमें मुसीबत में फंसे व्यक्ति की मदद जरूर करनी चाहिए। इससे हमें भविष्य में इसके अच्छे परिणाम जरूर मिलते हैं। साथ ही उसके उपकारों को ध्यान में रखना चाहिए।

कार्यक्रम में फागी परिक्षेत्र के नीमेडा कस्बे में 2 जून से 4 जून 2022तक होने वाले भव्य वेदी प्रतिष्ठा महामहोत्सव के पोस्टर का भी विमोचन किया गया।
टोंक जैन समाज के प्रवक्ता पवन कंटान ने अवगत कराया कि इस मौके पर समाज के श्यामलाल जैन, विरेन्द्र संघी, बृजमोहन मोहम्मद गढ़वाले, नेमीचंद बनेठा, सुरेश मलारना, अंकुर पाटनी, राजेश शिवाड, पारस उमवाले, रमेश काला, सुरेंद्र अजमेरा, मिट्ठू दाखिया सहित काफी लोग उपस्थित थे।
