48 डिग्री की प्रचंड धूप में ध्यानमुद्रा में दिगम्बर जैन मुनिश्री १०८ संकल्पसागर जी

जी हाँ यूँ विशुद्ध श्री संघ विशुद्व रत्नों की खान उसी खान में एक रत्न जिसे हम सभी विशुद्व रत्न 108 संकल्प सागर जी मुनिराज के नाम से जानते है
..मुनि श्री की चर्या के बारे में आप को क्या बोलूं जो सदैव निज में लीन रहते है
…भौतिक वादी हर परिपेक्ष से दूर ..चाहे बारिश चाहे गर्मी चाहे सर्दी हमेशा आपको वातावरण के प्रतिकूल चार्य करते देखेगें
… आशय गर्मी होगी तो ठंडे स्थान पर नही अपितु गर्म स्थान पर घंटो बैठकर वह अपनी आत्मा को तप से तपाते है
…वह बहुत कम वार्तालाप करते है पर निज से वह घंटो बाते करते है
…धन्य है ऐसे योगीश्वर धन्य है हमारे गुरु जी जिनकी अनुकंपा से हमे ऐसे श्रमणों के दुर्लभतम दर्शन और चर्या देखने मिल रही है
…आप भी ऐसे मुनिराज के दर्शन अवश्य करे….
जिनधर्म सदा जयवंत हो,,🙏
