
जैन धर्म के मुनिराज गणाचार्य विराग सागर अपने विशाल संघ के साथ सोमवार सुबह साढ़े आठ बजे नाथनगर कबीरपुर स्थित चंपापुर दिगंबर जैन सिद्धक्षेत्र पधारे।
देश के कई राज्यों से आये स्त्री, पुरुष श्रगणाचार्य विराग सागर ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा आज का समाज मानव मूल्यों के जिस संकट के दौर से गुजर रहा है उससे उबरने के लिए अहिंसा को अपनाने की महती आवश्यकता है। जिसके हृदय में प्रतिशोध या विरोध की भावना है वह व्यक्ति धन सत्ता आदि से चाहे जितना समर्थ हो लेकिन शांति प्राप्त नहीं कर सकता। हिंसा को प्रतिहिंसा से दूर नहीं किया जा सकता है। प्रेम क्षमा और सहिष्णुता में ही सबका भला है। स्वार्थ सोच को संकीर्ण बना देता है। पाद प्रक्षालन विजय रारा, गोपाल जैन, पदम पाटनी, जयकुमार काला ने किया। वहीं सभा का संचालन एवं आगत अतिथियों का स्वागत सिद्ध क्षेत्र मंत्री सुनील जैन द्वारा किया गया।
श्रद्धालुओं के जयघोष से पूरा सिद्ध क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर भगवान वसुपूज्य की पंचकल्याणक स्थली पर पहुंचकर सभी संतो के चेहरे पर खुशियां झलक रही थी। 23 मुनिराज 25 आर्यका माताजी ने मंदिर के प्रति जिनालय का दर्शन वंदन किया और भगवान वसुपूज्य की मूंगे वर्ण की प्रतिमा के समक्ष गणाचार्य विराग सागर जी ने संघ सहित ध्यान किया। इसके बाद समस्त संघ ने कोतवाली चौक स्थित जैन मंदिर का भी दर्शन किया। समस्त संघ समूह को मार्ग में पद बिहार करते देख स्थानीय वासी भी रुक कर नमन वंदन कर रहे थे।
