आचार्य अजित साग़र महाराज समाधि दिवस भाव भीनी विनयांजलि
प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी गुरुदेव की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के चतुर्थ पट्टाधिश आचार्य श्री अजित सागर जी का जीवन परिचय
वैशाख शुक्ला पूर्णिमा 16 मई 2022 समाधि दिवस 33 वे वर्ष पर जीवन परिचय
मध्यप्रदेश आष्टा नगर के समीप भौरा ग्राम में श्रीमती रूपा देवी श्री जवर चंद जी के चतुर्थ पुत्र का जन्म 1008 श्री चंद्र प्रभ भगवान के मोक्ष कल्याणक के पावन दिन
अवतरण हुआ पुत्र का नाम श्री राजमल जी रखा गया
शुभ दिन था फागुन शुक्ला 7 सप्तमी विक्रम संवत 1982 सन 1925 काप्रथम गुरु दर्शन18 वर्ष की अल्प उम्र में सन 1943 में गुरुदेव श्री वीर सागर जी के दर्शन किये।तथा संघ में प्रवेश की अनुमति लेकर संघ में प्रवेश किया। आपने 2 वर्षो तक शास्त्रों का स्वाध्याय निरंतर अध्ययन किया। आपने संयम पद पथ पर बढ़ते हुए झालरापाटन राजस्थान में 20 वर्ष की उम्र में 7 प्रतिमा तथा ब्रह्मचर्य व्रत के नियम आचार्य कल्प श्री वीर सागर जी से ग्रहण किये।
मुनि दीक्षाआचार्य श्री वीर सागर जी की समाधि कारण द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी महाराज से मुनि दीक्षा हेतु श्रीफल भेंट कर निवेदन किया। और विक्रम संवत 2018 कार्तिक सुदी 4 रविवार सन 1961 को सीकर राजस्थान में मुनि दीक्षा ग्रहण कर श्री राजमल जी मुनि श्री अजित सागर जी बन गए ।
मुनि श्री अजित सागर जी आचार्य श्री शिव सागर जी के साथ ही रहे।आचार्य पदतृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी की समाधि के पश्चात आपको चतुर्थ पट्टाधीश ज्येष्ठ शुक्ला 10 संवत 2044 7 जून 1987 उदयपुर में आचार्य पद दिया गया।आचार्य पद का आज्ञा पत्रआचार्य श्री अजित सागर जी महाराज ने स्वास्थ्य प्रतिकूल होने के कारण 31 जनवरी 1990 को संघस्थ मुनि श्री वर्द्धमान सागर जी को अपने बाद परम्परा के आचार्य पद का पत्र संस्कृत में लिखा।
सल्लेखना वैशाख शुक्ला पूर्णिमा संवत 2047 सन 1990 को आपकी समाधि हो गई।
राजेश पंचोलिया इंदौर वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी।
संकलित अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
