ब्रह्मचारी त्रिलोक भया की प्रथम पुण्यतिथि पर अश्रुपूरित नमन
श्री वर्णी गुरुकुल में वर्षों से साधना रत रहे आदरणीय ब्रह्मचारी त्रिलोक भैया जी जब वह विगत वर्ष को कोरोना से ग्रसित थे तब उनके निधन से कुछ दिन पूर्व मेरी व्हाट्सप के माध्यम से चर्चा हुई थी। उन्होंने कोरोना की जग लडते हुए उन्होंने साहस सबल का परिचय देते हुए कुछ पल सांझा किए थे,
त्रिलोक भया की कलम सेको
रोना ने मुझमें प्रवेश किया है
दर्द पीडा देने का प्रबंध किया है
बुखार खासी कफ ने मेरी परीक्षा ली हैमैं कोरोना से लड़ रहे डॉक्टर ,नर्स बहनो के चेहरे पर जो सेवा का भाव है
जिनकी आंखें करुणा से लबालब हैइन देवदूतो के चेहरो को देखकर प्रसन्न हूं।
परमपूज्य गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवम सभी ब्रह्मचारी भाइयों की सदभावना वसद्भावना श्रावक श्राविकाओ की शुभकामना व सभी साहित्य मित्रो की मंगलकामना के अमृत जल में अभिसंचित होकर क्लासिकल भक्ति संगीत का आनंद ले रहा हु।
ऐसे उत्तम विचारों के व्यक्तित्व को कोटि कोटि नमन वो हमारे बी च नही है ऐसा लगता है आज वो हमारे बीच ही है।
भाव भीना नमनअभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
