पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव एंव विश्व शांति यज्ञ के चौथे दिन तप कल्याणक महोत्सव
पिडावा
सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वाधान में नगर में पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। जैन समाज प्रवक्ता मुकेश जैन चेलावत ने बताया कि प्रातः काल जाप अनुष्ठान ,अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, व जन्म कल्याणक की पूजन प्रतिष्ठाचार्य पंडित प्रवर राजेश राज भोपाल, हरीश चंद्र शास्त्री, पं.अंकित शास्त्री सागर ने विधि विधान से संपन्न करवाईयुवराज आदिनाथ का विवाह राज्याभिषेक और वैराग्यपंचकल्याणक महोत्सव में बुधवार को मुनि भुतबलि सागर महाराज के ससंध 5 मुनिराजो के सानिध्य में युवराज आदिनाथ का विवाह राज्यभिषेक व वैराग्य संपन्न हुआ। यहां मजिनेंद्र जिन बिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में पहले बालक आदिनाथ का विवाह महारानी नंदा- सुनंदा से हुआ, फिर एक दिन राजा नाभिराय ने शुभ घड़ी देखकर युवराज आदिनाथ का राज्याभिषेक किया। देवराज इंद्र स्वर्ग से नये वस्त्र आभूषण लेकर अयोध्या नगरी पहुंचकर युवराज को भेट करते हैं। इसके अलावा आर्य खण्ड के सभी 32हजार राज्यों के महाराजा हीरे जवाहरात की भेट लेकर अयोध्या नगरी में पँहुचते है। फिर आदिनाथ का परिवार बढ़ता है उनके युवा पुत्रों बाहुबली एंव भरत तथा पुत्रियां राजकुमारी ब्रहमी एंव सुंदरी का जन्म होता है। महाराज के दरबार में एक दिन भरी सभा में नीलाजना नाम की नर्तकी नृत्य कर रही थी। उसी दौरान नृत्य करते-करते उसके प्राण पखेरू उड़ गये। देवराज इंद्र ने अपनी लीला से उसी क्षण दूसरी नर्तकी की भेज देते हैं ।लेकिन आदिनाथ को पता चल जाता है। और मन पर्याय ज्ञान अवधिज्ञान उत्पन्न होकर वैराग्य हो जाता है। उनके माता पिता व परिवार जन द्वारा उन्है लाख समझाने के बाद भी वन में प्रस्थान कर जाते हैं। महोत्सव के दौरान जब वैराग्य का प्रसंग हुआ तो श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। इस ऐतिहासिक पंचकल्याण में भीषण गर्मी में भी 7000 श्रावक,श्राविकाये प्रतिदिन पुण्य लाभ ले रहे हैं।
आयोजन के पल में रात्रि मे भगवान की महाआरती, विद्वानों के प्रवचन व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत खुशबू जैन ग्रुप मुंबई द्वारा भजनों की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। जिसमें भक्त गण ने मस्ती से झूम झूम कर भक्ति कर आनंद लिया ।
प्रातः काल के वात्सल्य भोज के पुण्या अर्जक डॉक्टर विकास जैन परिवार रहा।
धन को लक्ष्य नहीं,साधन बनाओ–मुनि सागर
पंचकल्याणक के दौरान मुनि श्री सागर महाराज ने अदबोधन में कहा की धन को लक्ष्य कभी मत बनाओ, बल्कि साधन बनाकर इसका सदुपयोग करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा की जब तक व्यक्ति कर्म के उदय का फल भोगेगा, तब तक धर्म का अधिकारी नहीं होता। व्यक्ति को ऐसा पुण्य भी नहीं करना चाहिए जिसके उदय से धर्म ही नहीं कर सके। पुण्य रूपी धन इतना ही करना जितना साधन बन जाये।
गुरुवार यह कार्यक्रम रहेगागुरुवार की बेला में प्रातः काल जाप अनुष्ठान,अभिषेक,शान्तिधारा,पूजन,तप कल्याण पूजन,मुनिश्री के मंगल प्रवचन,महा मुनिराजो की आहारचर्या,प्राण प्रतिष्ठा,सुरीमन्त्र,केवलज्ञान,

समवशरण की रचना,दिव्य ध्वनि का खिरना, सास्कृतिक कार्यक्रम, इतिहास के दो सुर्य भरत -बाहुबली पर आधारित नृत्य नाटिका होगी।
संकलित अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
