यदि आज मानवता को बचाना है, तो भगवान महावीर के बताए हुए मार्ग के अलावा दूसरा कोई मार्ग नहीं है। संभवसागर महाराज

JAIN SANT NEWS खुरई

यदि आज मानवता को बचाना है, तो भगवान महावीर के बताए हुए मार्ग के अलावा दूसरा कोई मार्ग नहीं है। संभवसागर महाराज

खुरई

प्राचीन जैन मंदिर में विराजित निर्यापक श्रमण मुनिश्री संभवसागर महाराज ने मांगलिक उद्बोधन मे कहा कि दुर्लभ से दुर्लभ वस्तु भी व्यक्ति को अति सुलभ होकर मिल जाती है लेकिन उसका सही मूल्यांकन नहीं हो पाता। उन्होने मानवता को बचाने पर जोर दिया और कहा यदि आज मानवता को बचाना है,

तो भगवान महावीर के बताए हुए मार्ग के अलावा दूसरा कोई मार्ग है ही नहीं है। अहिंसा का विशेष उल्लेख करते हुए मुनि श्री ने कहा अगर किसी ने भी पूर्ण अहिंसा को आचरण में उतारा हो एवं उसका प्रचार किया हो,

तो वह भगवान महावीर के ही तरह है। एक उदाहरण से उन्होने बताया की जैसे भोजन और पानी के बिना शरीर टिक नहीं सकता,

वैसे ही धर्म के बिना आत्मा टिक नहीं सकती है। कर्म सिद्धांत को बताते हुए कहा की जो भी कर्म को समझता है, वह संयोग-वियोग में सुखी या दुःखी नहीं होता है। कभी भी पापों को छिपाओ मत, उनको प्रकट कर दो। और उनका प्रायश्चित करो। तुम दूसरों से तो छिपा सकते हो, पर क्या अपने आप से भी छिपा सकते हो।

टीवी एवं मोबाइल क्षय रोग है,

मुनि श्रीमुनि श्री ने टीवी एवं मोबाइल क्षय रोग बताते हुए कहा यह क्षय रोग है, जिससे सदाचार का ह्रास होकर यह जन्म तो क्या, जन्म-जन्म बिगड़ जाते हैं। अगर हमारा चरित्र गया तो समझो सब कुछ चला गया। सदा दुःखी पर दया करना मानवता है, एवम दुःख दूर करना महानता है और दुःख का मूल कर्म-रोग दूर करना भगवत्ता है। सदा जीवन मे भगवत्ता अपनाओ अंत मे उन्होने गुस्से के विषय मे कहा कि आदमी गुस्से में लाल होता है, यह रेड लाइट है, उसे ग्रीन होने दो, गुस्सा शांत होने दो, फिर बात करो, वर्ना झगड़ा हो जाएगा।

संकलित अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *