परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी स संघ श्री दिगम्बर जैन मंदिर खंडेलवाल चौगान आश्रम बूंदी में बढ़ा रही है धर्म की भव्य प्रभावना
यदि मनुष्य वास्तविक सुख ,शांति पाना चाहता है तो उसे इच्छाओं की दास्ता, आसक्ति, ममता आदि की गुलामी से अपने को दूर करना होगा आर्यिका विज्ञाश्री



बूंदी
परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी श्री दिगंबर जैन मंदिर खंडेलवाल चौगान आश्रम में ग्रीष्म कालीन वाचना में धर्म की भव्य प्रभावना बढा रही है जैन महासभा के मिडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि आर्यिका श्री ने आज भरी धर्म सभा में श्रृद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि संसार का प्रत्येक प्राणी सूख जाता है, शांति की कामना करता है किंतु वह वास्तविक रुप से प्रयत्न नहीं करता आज के भौतिकवादी युग मैं सभी ने आसक्ति और परिग्रह को ही सुख का आधार मान लिया है परिग्रह बढ़ाने वाले व्यक्ति को अपना प्रिय जीवन सुख शांति सब का बलिदान करना पड़ता है ,इस कारण उसका जीवन सदैव तनावपूर्ण और अशांत रहता हैं | यदि मनुष्य वास्तविक सुख शांति पाना चाहता है तो उसे इच्छाओं की दासता, आसक्ति, ममता आदि की गुलामी से अपने को दूर करना होगा जिस क्षण वह इच्छाओं से ऊपर उठ जाएगा तत्क्षण ही इच्छित वस्तु उसकी तलाश करने लग जाएगी परिग्रह से दूरी करने वाले व्यक्ति समाज से उतना ही ग्रहण करता है जितना उसके जीवन के लिए अनिवार्य होता है| शेष वह समाज के कल्याण के लिए छोड़ देता है यदि सभी लोग जीवन में अपरिग्रह का आचरण करने लगे तो समाज में व्याप्त आर्थिक विषमता सहज में ही दूर हो सकती हैं | अंततः प्राणी मात्र को आध्यात्मिक आश्रम ग्रहण कर प्रयत्न पूर्वक भोगवाद से निवृत एवं त्यागवाद मे प्रवृत्त होने का प्रयत्न करना चाहिए क्योंकि आज की इस विषय भौतिकवादी परिस्थिति मैं त्याग मुक्त भोग के आचरण से ही ईश्वर का कृपामात्र बना जा सकता है इस संसार में जो कुछ भी है वैसे भी प्राणियो के लिये है अतः जितने से अपना काम चले उतना ही ग्रहण करें | दूसरो के हिस्से के लिये ललचायें नहीं । कार्यक्रम बाद आर्यिका श्री ने सभी भक्तजनों को मंगलमय आशीर्वाद दिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
