आचार्य ज्ञानसागर महाराज की दूरदृष्टि थी संभव साग़र महाराज
खुरई
धर्म प्राण नगरी खुरई में निर्यापक श्रमण संभव साग़र महाराज संघ की ग्रीष्मकालीन वाचना हो रही है। बुधवार को निर्यापक श्रमण संभवसाग़र महाराज ने मूकमाटी महाकव्य पर उदबोधन देते हुए कहा जीवन को उन्नत बनाने का माध्यम है मूकमाटी है उन्होंने गुरु और शिष्य का महत्व बताया गुरु ज्ञान सागर महाराज ने भी शिष्य को जान लिया शिष्य ने भी दक्षिण भारत से उत्तर भारत में आकर अपने को गुरु को समर्पित कर दिया। बालक विद्याधर को1968में मुनि दीक्षा दी। मुनि श्री ने कहा आचार्य ज्ञानसागर महाराज की दूरदृष्टि थी। वे जानते थे मेरा शिष्य संकोची, शर्मिला और गुणवान है। उनकी दूरदृष्टि सन 1972 में विद्यासागर महाराज को आचार्य पद प्रदान किया। आचार्य पद पर उन्हें 50 वर्ष हो गए है और आचार्य विद्यासाग़र महाराज के पास शिक्षाविद आए और उनसे जाना शिक्षानीति केसी हो। उन्होंने कहा हर कार्य को हिदी में किया जाना चाहिए।जिसे शिक्षाविद ने भी माना। आचार्य श्री ने उन सभी वरिष्ट जनों से कहा न्यायालय में भी हर कार्य हिदी में होना चाहिए। जिसे सभी ने माना है। मुनि श्री ने आगे कहा सरल आँखे नम होती है। नम आंखे सरलता को बताती है। यही सरलता आचार्य भगवन विद्यासाग़र महाराज में है आचार्य ज्ञानसागर में थी उन्होंने जयोदय, वीरोंदय जैसे महाकाव्यों को लिखा लेकिन उन्होंने किसी को प्रकाशन को कहा यही उनकी सरलता थी। उन्होंने कहा गुरु सागर के सम्मान गम्भीर होते है।
अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
