फागी में अक्षय तृतीया (दान पर्व) पर जैन समाज की महिलाओं ने रखा व्रत उपवास
फागी
अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर जैन समाज की महिलाओं ने व्रत एवं उपवास करके संयम नियम की पालना की, जैन समाज के मीडिया प्रवक्ता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि आज जिनालयों में प्रातः अभिषेक, शांतिधारा बाद अष्टद्रव्यों से पूजा हुई ,अक्षय तृतीया के महत्व पर जानकारी पर ज्ञात हुआ कि जेन परम्परा के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही दान की परम्परा शुरू हुई थी, जैन परम्परा में इस दिन का बडा महत्व है,इसी कारण इस पर्व को श्रृद्वा भाव से मनाया जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर दान करने का बहुत महत्व है, इस दिन दान करने से कई गुना फल प्राप्त होता है इस दिन दिये गये दान का कभी भी क्षय नहीं होता है।
इस दिन जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ने राजा श्रेयांश के यहां इक्षु रस का आहार लिया था, जिस दिन तीर्थंकर ऋषभदेव का आहार हुआ था उस दिन बैशाख शुक्ला अक्षय तृतीया थी, उस दिन राजा श्रेयांश के यहां भोजन अक्षीण( कभी खत्म न होने वाला) हो गया था। अतः श्रृद्धालु इसे अक्षय तृतीया कहते हैं ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगजमंडी
