आनंद धाम के नाम आते है मन में आनन्द सा आ जाता है संभव साग़र महाराज



खुरई
धर्म प्राण नगरी खुरई में निर्यापक श्रमण संभवसागर महाराज संघ सानिघ्य व आर्यिका आदर्शमती माताजी संघ सानिध्य में अक्षय तृतीया पर्व मनाया गया। प्रातःकी बेला में समस्त मुनि संघ व आर्यिका संघ को बेंड बाजो के साथ आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज की प्रेरणा व आशीष से बन रहे आनंद धाम तीर्थ लाया गया।



जहां सर्वप्रथम आचार्य श्री के चित्र का अनावरण व दीप प्रज्वलन किया गया। वही भक्ति भाव के साथ अष्ट द्रव्यों से आचार्य श्री का पूजन किया गया।


दान देने की अपनी सामर्थ्य को छुपाना नही चाहिए आदर्शमती माताजी
आचार्य श्री पूजन उपरान्त आदर्शमती माताजी के मंगल उदबोधन हुए उन्होंने अक्षय तृतीया का महत्व बताया कहा आज के दिन भगवान आदिनाथ को प्रथम आहार प्राप्त हुआ।आज से पूर्व नवधा भक्ति को कोई जानता नही था।श्रेयांस राजा को नवधा भक्ति का स्वप्न स्मरण में आया।और उन्होंने नवधा भक्ति पूर्वक आहार तभी से यह दिन दान प्रवर्तन के रूप में जाने लगा।और इसे अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। माताजी ने दान के विषय पर प्रकाश डाला और कहा दान देना सीखना चाहिए। दान देने से प्रेम का वातावरण बने। प्रेम अगर आ जाएगा तो धन वैभव भी अपने आप आ जाएगा। उन्होंने कहा धन का सदुपयोग करो कोन उत्तम पात्र है उसी के अनुसार दान करना चाहिए। आगम में चार प्रकार के दान का महत्व बताया गया। अपने पद का दुरुपयोग न करे। पद प्रतिष्ठा में न पड़े। उन्होंने कहा दान देने के दिव्य अवसर को कभी छोड़े नही। दान अगर दिया जाता है तो वह दिन दूना रात चौगुना बढ़ता है।अपनी सामर्थ्य को छुपाना नही चाहिए। अपनी सामर्थ्य अनुसार दान अवश्य देना चाहिए।दान देने वालो की होड़ लग गयी।




अक्षय तृतीया के अवसर पर आनंद धाम तीर्थ बन रहे जिनालय हेतु दान दातारो में एक होड़ सी लग गई। भक्तो ने बढ़ चढ़कर दान राशि दी।
वही सभा के अंत में निर्यापक श्रमण सम्भव साग़र महाराज ने अपने उदबोधन में आनन्द धाम तीर्थ के विषय पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा दान का ही मुख्य पर्व है अक्षय तृतीया द्रव्य,क्षेत्र,काल भाव के अनुसार दिया गया दान का ही विशेष महत्व है। जब यह तीर्थ बन जाएगा तो ट्रैन से निकलने वाले यात्री की द्र्ष्टि इस तीर्थ पर पढ़ने से नही रोक पाएगी। और इस मनोरम जिनबिंब के दर्शन करने भी आएगे। जैन ही नही जैनेतर भी आएगे।उन्होंने कहा जिनबिंब का दर्शन पाप का नाश करने वाले होता है। आप सभी खुरई वासी पाप नाश में निमित्त बनेगे। उन्होंने कहा आनंद धाम नाम मे ही आकर्षण है।
नाम आते ही आनन्द की अनुभूति होती है। आज के शुभ दिन का अखण्ड मुहर्त है। आज के दिन संकल्प ले इसे जल्द पूर्ण करेगे। आप सभी को तन मन धन से इस तीर्थ के लिए जुड़ना है। जिस तीर्थ को चरण सानिघ्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का मिला वह तीर्थ पूर्ण होना है। यह पुण्य का ही सहयोग है। यही भावना करे इसकी प्रतिष्ठा भी उन्ही के सानिध्य में हो। आने वाले पीढ़ियों के लिए इस तीर्थ के लिए दान अवश्य करे। वही इस स्थान पर भूमि पूजन भी किया गया।
समस्त आयोजन ब्रह्मचारी धीरज भैया,ब्रह्मचारी अंकित भैया के निर्दशन में हुआ। इस अवसर पर समिति की और से अल्पाहार की व्यवस्था रही।
वही सभी को इछुक रस भी पिलाया गया। वही यहाँ भक्तो में सन्तो को आहार दान देने की होड़ सी रही।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमडी
