स्म्रति के झरोखे से रामगंजमडी शिखर कलश स्थापना 24 अप्रैल 2017























दो दिवसीय ध्वजारोहण शिखर कलश स्थापना याग मंडल हवन मुनि संघ के सानिध्य मे सम्पन्न हुआ था जो 24 अप्रैल 2017 को सम्पन्न हुआ था वह स्म्रति हम पुनः साँझा कर रहे है
बिना रत्नत्रय प्राप्ति के जीवन का मोल नहीं चन्द्रप्रभ सागर जी
जिस तरह शिखर पर कलश के बिना मंदिर नहीं होता उसी तरह संतो और देव शास्त्र गुरु के बिना जीवन अधुरा विनीत सागर जी
रामगंजमंडी
24 अप्रैल 2017 की वह प्रातः कालीन बेला मे शिखर कलश स्थापना दो दिवसीय कार्यक्रम विश्व वन्दनीय आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि द्वय मुनि श्री 108 विनीत सागर जी मुनि श्री 108 चन्द्रप्रभ सागर जी महाराज के सानिध्य मे सम्पन्न हुआ था। प्रातः कालीन अभिषेक शांतिधारा हवन की क्रिया पंडित श्री सनत कुमार शास्त्री भानपुरा के निर्देशन मे हुई थी। उसके उपरांत कलश यात्रा नगर परिक्रमा करती हुयी मुनि द्वय के सानिध्य मे निकली थी। वही समाज जन द्वारा मुनि संघ को महावीर जिनमन्दिर लाया गया था। जहा मुनि संघ ने चैत्यालय के दर्शन किए थे। उसके उपरांत मुनि द्वय के प्रवचन हुए प्रवचन से पूर्व मंगलाचरण अनुकृति जैन कोटा ने किया था। सभा का सञ्चालन पदम सुरलाया ने किया था
बिना रत्नत्रय की प्राप्ति के जीवन का मोल नहीं चन्द्रप्रभ सागर जी
उस बेला में प्रवचन देते हुए मुनि श्री चन्द्रप्रभ सागर जी ने कहा था शिखर पर कलश कितने ही स्थापित कर लो कुछ नहीं होने वाला जब तक रत्नत्रय की प्राप्ति नहीं होगी। विस्तार पूर्वक 10 मिनट के उदबोधन मे कहा की जिस तरह सम्यज्ञ दर्शन ज्ञान चरित्र तीन रत्न है, उसी तरह देव शास्त्र गुरु भी रत्न के समान है। उन्होने कहा था कितने आयोजन किए जाये कुछ होने वाला नहीं गुरु की भक्ति मे उनका दर्शन करो। रात्रि भोजन त्याग, छान कर पानी पीने पर भी मुनि श्री ने अपना ध्यान आकृष्ठ किया था।
इस मांगलिक बेला में मुनि श्री विनीत सागर जी महाराज ने अपने उदबोधन में कहा था जिस प्रकार मंदिर का शिखर पर कलश बिना अधुरा है, उसी तरह गुरु की शरण बिना जीवन अधुरा है। श्रावको के षट आवश्यको का पालन करना चाहिये। अनेक कथनों के माध्यमो से मुनि श्री ने कहा हमेशा सदसंगती और संतो की संगती करनी चाहिये। जो जीवन को उन्नति की और ले जाती है। और आत्म बोध की और जाग्रत कराती है। और कुसंगती जीवन को पतन और नष्ट करती है।
शिखर कलश स्थापना
प्रवचन के उपरांत मुनि संघ के सानिध्य मे पंडित सनत कुमार शास्त्री के निर्देशन मे शिखर पर कलश स्थापना की क्रिया सम्पन्न हुयी थी। कलश स्थापना करने का गौरवमयी सोभाग्य हुकुमचंद नितेश ठाई ने प्राप्त किया था। वही ध्वज दंड आरोहण का गौरवमयी सोभाग्य प्रमोद कुमार अंकुश बाबरिया ने प्राप्त किया था। और स्वर्ण कलश परिभ्रमण का सौभाग्य नेमीचंद पदमकुमार सुरलाया ने प्राप्त किया था।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
