
रहली । कहते हैं रहली स्थित अतिशय क्षेत्र पटनागंज का इतिहास हजार साल पुराना है और जितना पुराना इसका इतिहास है उतनी ही अटूट लोगों की बड़े बाबा भगवान महावीर प्रभु के ऊपर श्रद्धा है । इस सदी का पहला अतिशय देखने वाले समकालीन लोग बताया करते थे जो लिपीवद्ध भी है लगभग 80 वर्षों पहले एक छोटा बच्चा जो कि जन्मांध था अपने पिताजी के साथ बड़े बाबा के दर्शन करने पटनागंज आया और उसी समय • उनकी भेंट 105 क्षुलक श्री गणेश प्रसाद वर्णी जी से हुई । वर्णी जी ने उस बच्चे में छुपी प्रतिभा को पहचान लिया क्योंकि वह बच्चा जन्मांध भले ही था परंतु उसे जैन पूजा अर्चनाएं कंटस्थ याद थी उसका ईश्वर के प्रति समर्पण देखने लायक था । वर्णी जी ने उस बच्चे से प्रभावित होकर उसके पिता से कहा कि अगर आप इसी क्षेत्र में रहकर बड़े बाबा की आराधना करते है तो आपके बच्चे की आंखों की रोशनी जरूर वापस आएगी । एक पिता करता भी क्या अपने बच्चे को स्वस्थ करने के लिए वर्णी जी की बातों का अक्षर सा पालन करने लगे और नित्य प्रतिदिन बड़े बाबा का अभिषेक कर पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ अपने बालक की आंखों में गंधोदक लगाने लगे , फिर एक दिन चमत्कार ही हो गया जब गंधोदक लगाते समय बच्चे की आंखों की रोशनी वापिस आ गई और सर्व प्रथम उसने बड़े बाबा की मूरत को देखा और जैसे ही उस बच्चे को अपने ईश्वर अपने आराध्य का दर्शन प्राप्त हुआ वह झूम उठा , उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा ।
भक्त इस दृश्य को आसपास खड़ेपुजारियों ने और जनों ने जैसे ही देखा तो जोरों शोरों से बड़े बाबा का जयकारा गूंजने लगा और यह चमत्कार पूरी दुनिया को पता चल गया । इसके पश्चात बालक लोकमन ने आजीवन ब्रह्मचर्य अंगीकार किया और बड़े बाबा के चरणों में अपना 80 वर्ष का जीवन समर्पित कर दिया ।
आज यह जानना जरूरी है कि ऐसा ही दूसरा चमत्कार अतिशय हाल ही हम सबके समक्ष हुआ है । जब इस युग के आचार्य विद्यासागर भगवंत जी महाराज जिनका जन्म दक्षिण में हुआ , उत्तर में दीक्षा हुई , मध्य क्षेत्र जिनका तपस्या केन्द्र रहा सारा संसार आज जिनकी आराधना
करता है जिन्हें अपना ईश्वर मानता है , कुछ दिनों पूर्व से उनका स्वास्थ अनुकूल नहीं था और कुंडलपुर के भव्य कार्यक्रम के बाद गुरुदेव का नित्य बिहार चल रहा था । गुरुदेव के स्वास्थ में दिन वा दिन गिरावट होना एक बहुत बड़ी चिंता का विषय बन रहा था । जहां एक ओर अगर किसी सामान्य व्यक्ति का हीमोग्लोबिन 4/5 पर पहुंच जाता है तो उस व्यक्ति की स्थिति मरणासन की हो जाती है , वहीं दूसरी ओर गुरुदेव का हीमोग्लोबिन 3/4 पर पहुंच गया था हर व्यक्ति चिंतित था की जहां गुरुदेव इतने कठोर नियमों का पालन करते हैं आहार में नमक , शक्कर दूध , हरी सब्जी , फल , मेवा का लम्बे अरसे से त्याग है आहार बहुत सीमित होता है तब उनके स्वास्थ्य में सुधार कैसे होगा चिंता का विषय था ।
यह बहुत बड़े चमत्कार की बात है जैसे ही गुरुदेव कुंडलपुर के बड़े बाबा प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ को उच्च आसन और भव्य जिनालय प्रदान कर रहली पटना गंज की सीमा में प्रवेश किया तो उन्हें बड़े बाबा 24 वे तीर्थंकर भगवान महावीर प्रभु पारसनाथ भगवान वा मुनि सुब्रतनाथ भगवान का आशीर्वाद प्राप्त हुआ तो कुछ दिनों के अंदर ही गुरुदेव के स्वास्थ में सुधार होना शुरू होने लगा । उनके चेहरे पर बिखरी रहने वाली मंद मंद मुस्कान लौटकर ऐसे खिल उठी मानो रात्रि के अंधकार में बंद कमल को सूरज की रोशनी मिल गई हो । संसार भर में बिखरे भक्तगण जाप , अनुष्ठान , शाँतिधारा , विधान आदि कर गुरु जी के स्वास्थ में निरंतर सुधार की प्रार्थना करते रहे उसे जारी रखते हुए सभी लोग अभी भी अपने आराध्य से जरूर प्रार्थना करें की हे ईश्वर हमारे गुरुदेव का स्वास्थ्य जल्दी से पूर्णता सही हो जाए और उनका आशीर्वाद हम सभी पर सदैव बना रहे क्योंकि कहते हैं कि जहां चले ना काम दवा से , वहां दुआ काम आती है । लगभग तीन सप्ताह के बाद आचार्य श्री पहली बार पड़गाहन देने बाहर निकले भक्तों ने भरपूर दर्शन लाभ लिया ।
