● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Video 02 : : गोम्म्टेश स्तुति : : छंद 03 – 04
स्तुतिकार- आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धांत चक्रवर्ती
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
सुकण्ठ-सोहा जिय-दिव्व-संखं,
हिमालयुद्दाम-विसाल-कंधं।
सुपेक्खणिज्जायल-सुट्ठु-मज्झं,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं।।3।।
विंज्झायलग्गे पविभासमाणं,
सिहामणिं सव्व-सुचेदियाणं।
तिलोय-संतोसय-पुण्ण-चंदं,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं।।4।।
भगवान गोम्म्टेश्वर बाहुबली की विश्व प्रसिद्ध स्तुति का पहली बार एक एक शब्द से अर्थ को समझने के लिए click कीजिए…
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