● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●

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Day 36 : : तत्त्वसार गाथा 70 – 71
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर

धम्माभावे परदो
गमणं णत्थि त्ति तस्स सिद्धस्स।
अच्छइ अणंत-कालं
लोयग्ग-णिवासिओ होउ।।70।।

संते वि धम्म-दव्वे
अहो ण गच्छेइ तह य तिरियं वा।
उड्ढ-गमण-सहाओ
मुक्को जीवो हवे जम्हा।।71।।

Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें
➡️ https://youtu.be/0yAm7jrwbQ4

तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल : https://www.youtube.com/playlist?list=PLb6OtA3xYjEMlxRECwcg1rrSXHjC5L_lg

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