● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 34 : : तत्त्वसार गाथा 66 – 67
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
घाइ-चउक्के णट्ठे
उप्पज्जइ विमल-केवलं णाणं।
लोयालोय-पयासं
कालत्तय-जाणगं परमं।।66।।
तिहुवण-पुज्जो होउं
खविउ सेसाणि कम्म-जालाणि।
जायइ अभूदपुव्वो
लोयग्ग-णिवासिओ सिद्धो।।67।।
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तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल : https://www.youtube.com/playlist?list=PLb6OtA3xYjEMlxRECwcg1rrSXHjC5L_lg
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