● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 33 : : तत्त्वसार गाथा 64 – 65
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
ण मरइ तावेत्थ मणो
जाम ण मोहो खयं गओ सव्वो।
खीयंति खीण-मोहे
सेसाणि य घाइ-कम्माणि।।64।।
णिहए राए सेण्णं
णासइ सयमेव गलिय-माहप्पं।
तह णिहय-मोह-राए
गलंति णिस्सेस-घाईणि।।65।।
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➡️ https://youtu.be/WOsmbABYz6M
तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल : https://www.youtube.com/playlist?list=PLb6OtA3xYjEMlxRECwcg1rrSXHjC5L_lg
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