● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 31 : : तत्त्वसार गाथा 60 – 61
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
जा किंचि वि चलइ मणो
झाणे जोइस्स गहिय-जोयस्स।
ताम ण परमाणंदो
उप्पज्जइ परम-सुक्खयरो।।60।।
सयल-वियप्पे थक्के
उप्पज्जइ को वि सासओ भावो।
जो अप्पणो सहावो
मोक्खस्स य कारणं सो खु।।61।।
Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें
➡️
तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल : https://www.youtube.com/playlist?list=PLb6OtA3xYjEMlxRECwcg1rrSXHjC5L_lg
★Share in all ur Jain groups★
