
जैन धर्मावलंबियों द्वारा पर्वराज पर्यूषण विधि – विधान पूर्वक मनाया जा रहा है । दस लक्षण पर्व के आज तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म श्री 1008 चिंतामणी पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर धाम पन्ना में 105 भु . आराधना श्री माता जी व क्षु . श्री 105 साधनाश्री माता जी के ससंघ सानिध्य में बड़ी धूमधाम से मनाया गया । माताजी ने अपनी देशना में श्रावकों को संबोधित करते हुये कहा उत्तम शौच का अर्थ है पवित्रता , आचरण में नम्रता , विचारों में निर्मलता लाना ही शौच धर्म है । बाहर की पवित्रता का ध्यान तो हर कोई रखता है लेकिन यहां आंतरिक पवित्रता की बात है । आंतरिक पवित्रता तभी घटित होती है जब मनुष्य लोभ से मुक्त होता नी है । उत्तम शौच धर्म कहता है कि त आवश्यकता , आकांक्षा , आसक्ति र्थ और अतृप्ति के बीच को समझकर , चलना होगा , क्योंकि जो अपनी व आवश्यकताओं को सामने रखकर । चलता है वह कभी दुखी नहीं होता है और जिसके मन में आकांक्षाएं हावी हो जाती हैं . वह कभी सुर्ख नहीं होता । हावी हुई आकांक्षा आसक्ति की ओर ले जाती हैं और आसक्ति पर अंकुश न लगाने पर अतृप्ति जन्म लेती है । अंततः प्यास , पीड़ा , आतुरता और परेशानी बढती ही जाती है । धर्म पथ पर चलते हुए मन में विचारों में और आचरण में शुद्धता लानी होगी । कषाय को , लोभ को और मलीनता को कम करना होगा । धनाकांक्षा , भोगाकांक्षा , दराकांक्षा और महत्वाकांक्षा इनकी तीव्रता से अपने आप को बचाकार ही . उत्तम शौच धर्म को अपने आचरण में लाया जा सकता है । आगे पर्युषण पर्व के अवसर पर रात्रि के आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में पर्दूषण के 10 धर्मो की भाषण प्रतियोगिता रखी गई । जिसमें 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में प्रथम स्थान लाडो जैन , द्वतीय स्थान धैर्य जैन व तृतीय स्थान अनेकान्त जैन व ओम जैन ने प्राप्त किया । इसी क्रम में 15 वर्ष से उपर की आयु वर्ग में प्रथम स्थान ताशी जैन , द्वतीय स्थान सुमित जैन व तृतीय स्थान आन्या जैन ने प्राप्त किया ।
