● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 22 : : तत्त्वसार गाथा 42 – 43
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
दिट्ठे विमल-सहावे
णिय-तच्चे इंदियत्थ-परिचत्ते।
जायइ जोइस्स फुडं
अमाणुसत्तं खणद्धेण।।42।।
णाणमयं णिय-तच्चं
मेल्लिय सव्वे वि पर-गया भावा।
ते छंडिय भावेज्जो
सुद्ध-सहावं णियप्पाणं।।43।।
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तत्त्वसार | आचार्य देवसेन स्वामी | द्रव्यानुयोग | गाथा 01-74 | शुद्ध पाठ | शब्दार्थ | व्याकरणिक विश्लेषण | व्याख्या | डॉ. पुलक गोयल :
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