शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍
परिवारकीमनोदशा : दरवाजे पर आहट सुनकर महावीर प्रसाद जी आगे बढ़े, देखते हैं तार आया है। वे कर्मचारी से तार लेकर पढ़ते हैं। चकित माता पिताजी को बतलाते हैं- ३० जून को विद्याधर की मुनि दीक्षा होने वाली है।
बोले पिता कहाँ अजमेर में? ज्ञानसागरजी के पास?
-जी हाँ।
- क्षण भर को पिता स्तब्ध रह गए। उनका वह सोचना कि पंचमकाल में कौन युवक मुनि बनता है, निरर्थक दिखने लगा। उन्हें अपने द्वारा कहे गये शब्द झूठे लगने लगे ऐसा कौन आचार्य है जो इतनी छोटी उम्र के युवक को महाव्रती बना दे ?
तार सुनकर पिताजी चकित थे, वे सिर झुकाए रहे। मौन। यही हाल माँ का था, कुछ न बोली, बस आँखों के रास्ते लुढ़का दिए दो रत्न सारे घर का वातावरण कुछ विचित्र सा हो गया उस दिन ग्रामीणों को भी पता चल गया–विद्या को मुनि दीक्षा मिलने वाली है। उन्होंने पूछना शुरू कर दिया मल्लप्पाजी के परिवार से परिवार का सदस्य गाँव में कहीं किसी भी जगह दिख जाता तो सामने वाला अवश्य पूछ बैठता हमने सुना विद्या मुनि हो रहा है?
उत्तर में आँखें झुक जाती प्रेम से शब्दों की जरूरत ही न पड़ती अजमेर पहुँचने के लिए घर का कोई सदस्य न तो निर्णय ले पा रहा था, न दे पा रहा था। सब का ध्यान मल्लप्पाजी की स्वीकृति पर था। वे शान्त रह गए थे। किसी से कुछ न कह रहे थे तब बड़े भाईसाब का बोध जागा- मैं बड़ा हूँ, यदि माता-पिता नहीं पहुँचते तो न सही, मुझे अजमेर समय पर पहुँचना चाहिए।
तीव्र गर्मी, ऊपर से बाहर जाने की चिन्ता, झुलसा झुलसा दे रही थी। महावीर बाबू को फसलें खेतों से खलियान होती हुई घरों पर और सेठों की दुकानों पर पहुँच चुकी थी, मगर सेठों की तिजोरी से उनका मूल्य अभी मल्लप्पाजी को उपलब्ध नहीं हुआ था। उपलब्ध करने की कोई जल्दी भी नहीं थी, जैसा हर साल होता था, विद्या की दीक्षा के कारण अजमेर जाने की बात तो अचानक ही सामने आई थी। दीक्षा को कुछ दिन ही शेष रह गए थे।
महावीर बाबू घर के हालातों से परिचित थे। वे अनाज खरीद कर रख लेने वाले सेठों-साहूकारों / महाजनों का हाल भी जानते थे, जो केवल अपनी सुविधा से फसलों का रुपया किसानों के घर पहुँचाते थे। महावीर बाबू को अजमेर चल देने के पूर्व सेठों-महाजनों के दरवाजे जाने और एक के बजाय दो चक्कर लगाने का समय नहीं था। अतः उन्होंने अपना रेडियो एक परिचित को बेच दिया और उपलब्ध राशि लेकर निकल पड़े अजमेर को ममत्व की पराकाष्ठा सजीव हो उठी उस दिन।
पोस्ट-89…शेषआगे…!!!
