चन्द्रोदय तीर्थ चांदखेड़ी
*निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव समता परीणामी108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा
गुटखा खाने वाले को देखकर गुटखा खाने का भाव आया,गुटखे के त्यागी को देखकर त्याग का भाव क्यों नहीं आया
1.त्यागी-गुटखा खाने वाले को देखकर गुटखा खाने का भाव आया,गुटखे के त्यागी को देखकर त्याग का भाव क्यों नहीं आया,जो व्यक्ति को देखकर संगति मे बदल जाता है वह व्यक्ति सुधर जाएगा हमारी आदत है जैसी संगति मिलेगी वैसे सुधर जाएंगे डाकू की संगति से डाकू हुआ साधु के संगति से साधु हो जाएगा।
2.गुण ग्रहण-हम श्रावको साधु को साधु रुप मानते हैं अच्छा मानते हैं साधु बनने के भाव नहीं आते हैं स्वयं का विकास नहीं कर पाएंगे हमारे गुरुदेव अच्छे हैं लेकिन स्वयं साधु बनने का भाव नहीं करते हैं नौकर सेवा करते हैं लेकिन गुण ग्रहण का भाव नहीं करते है हम भगवान का नाम लेते हैं सब कुछ जान कर भी हम उसके गुण ग्रहण का भाव नहीं करते भगवान का नाम लेते हैं लेकिन उनके जैसा भाव नहीं आता हम भगवान का नाम लेते हैं,जयकारे लगाते हैं लेकिन फिर भी हम काटते हैं एक भगवान का नहीं नहीं लेता काटता भी नहीं है वह अच्छा है गुण को देखकर ग्रहण करने का भाव नहीं आता हैं
3.प्रकृति-स्वयंभू शक्ति जो है प्रकृति स्वयं की नहीं सुधारोंगे वह स्वयंभू शक्ति जागृत नहीं होगी हर व्यक्ति दूसरे को अच्छा देखना चाहता लेकिन स्वयं को अच्छा नहीं बनाता है हम अच्छाई को जानते हैं मानते भी हैं लेकिन अच्छा नहीं होना चाहते हम अच्छे को अच्छे रुप नहीं मानते हैं।
प्रवचन से शिक्षा-डाकू की संगति से डाकू हुआ,साधु के संगति से साधु हो जाएगा।
सकंलन ब्र महावीर विजय धुर्रा 7339918672 परम गुरु भक्त
12अगस्त2021
नमनकर्ता-अभय कुमार अनुराग अभिषेक संध्या रानू शिखा खुशी ईशु सिंघई करकबेल
पुज्य सुधासागर जी के प्रवचनांश व अमृत सुधावाणी के लिए जुडे
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