● प्राकृत जैनागम मूलग्रन्थ स्वाध्याय●
Day 03 : : तत्त्वसार गाथा 04 – 05
ग्रंथकार- आचार्य देवसेन स्वामी
प्रस्तुति- डॉ. पुलक गोयल, जबलपुर
तेसिं अक्खर-रूवं
भविय-मणुस्साण झायमाणाणं ।
बज्झइ पुण्णं बहुसो
परंपराए हवे मोक्खो ।।4।।
जं पुणु सगयं तच्चं
सवियप्पं हवइ तह य अवियप्पं ।
सवियप्पं सासवयं
णिरासवं विगय-संकप्पं ।।5।।
Video के द्वारा अर्थ समझने के लिए click करें
➡️ https://youtu.be/Wy53a8vQKFo
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