शेयर 🤗 #विद्याधरसेविद्यासागर (किताब)😍
मंदिर जाने के नाम पर वह अत्यन्त निर्भीक है। तभी तो समीपवर्ती मंदिरों के साथ-साथ वह उस मंदिर को भी जाता है जो घर से एक किलोमीटर हैं। जहां आने जाने में बच्चों को रास्ता में डर हो आता है।
फिल्म देखकर लौटने के बाद वह सोता नहीं है, हाथ मुँह धो, कुल्ला कर मंदिर जाता है। भक्ति और निर्भीकता की धारायें उसमें सतत बहती रहती हैं। एक बार घर पर सुबह-सुबह फूलों की आवश्यकता थी, सो विद्या को शाम को ही फूल तोड़कर रख लेने का आदेश मिला। उसे लगा- शाम को तोड़े गये फूल सुबह तक कुम्हला जावेंगे। फलतः वह शाम को नहीं गया, बड़े भोर के चक्कर में रात ३ बजे ही उठ गया और फूल तोड़ने उस स्थान पर पहुँच गया जहाँ शाम को ही किसी मृतक का अग्नि-संस्कार किया गया था।
चिता जल रही थी, विद्याधर समीप ही पौधों से फूल तोड़ रहे थे। ओठों से णमोकार मंत्र निःसृत हो रहा था।
मंदिर, प्रवचन, विधान, पंचकल्याणक के नाम पर मयूर नृत्य करने लगता है, तन-मन विहँस जाता है उसका।
पोस्ट-58…शेषआगे…!!!

