🤗54वाँ #दीक्षादिवस 30 जून 2021☺️ #भाग्योदयतीर्थ_सागर 😍
प्रवचनांश- प्रथम निर्यापक श्रमण मुनिश्री #समयसागर जी महाराज।
ज्ञान का प्रभाव अपनी जगह है, चरित्र का प्रभाव अपनी जगह रखता है। आचार्य गुरुदेव की साधना और तपस्या से ही पूरा विश्व उनके सामने नतमस्तक रहता है। गुरुदेव की नजर व्यक्तिगत नहीं विश्व कल्याण की रहती है।
निर्यापक श्रमण मुनिश्री #समयसागर जी महाराज ने कहा तिथि के अनुसार आषाढ़ सुदी पंचमी के दिन दीक्षा दिवस आता है। लेकिन तारीख के हिसाब से 30 जून है। अतः आज भी मनाया है और तिथि के अनुसार भी दीक्षा दिवस मनाएंगे। लेकिन कहां पर, यह संकेत आने के बाद पता चलेगा। उन्होंने कहा ड्रेस चेंज होने के बाद बहुत परिवर्तन आता है।
गुरुदेव की दृष्टि जब धर्म सभा में होती है तो वह किसी व्यक्ति पर नजर नहीं रखते बल्कि वह पूरी धर्म सभा पर नजर रखते हैं। आचार्यश्री विश्व के कल्याण की भावना रखते हुए सोचते हैं, व्यक्ति की नहीं।
“समर्पण आस्था के बिना मार्ग प्रारंभ नहीं होता”।
वस्तु न तो नई है और न ही पुरानी वह तो नश्वर है। आत्म कल्याण करना चाहते हो तो चिंतन बहुत सारा करना पड़ेगा। द्रव्य दृष्टि से निर्भीकता आती है और पर्याय की ओर दृष्टि जाती है तो वैराग्य होता है।
उन्होंने कहा- आचार्य भगवन जब बैठे भी रहते हैं तो उनका चिंतन लगातार जारी रहता है। हमें लगता है कि वे हमें देख रहे हैं, लेकिन वे आत्मस्वरूप का ध्यान करते रहते हैं। वह हमेशा श्रमण समाज की ओर सोचते हैं। इतना विराट रूप देकर उन्होंने गुरुकुल बना चतुर्बिध संघ बना दिया।

