👉वीर निर्वाण सम्वत -2547 -48 , विक्रम सम्वत – 2078
05 जून , 2021 शनिवार , ज्येष्ठ माह , कृष्ण पक्ष, एकादशी
🙏 वास्तु >> ऐसी अचेतन ऊर्जा जो ना तो नजर आती है और ना ही महसूस होती है फिर भी चेतन को प्रभावित करती है , क्या है ?
समाधान –
१- वातावरण की शुद्धि और अशुद्धि के कारण उत्पन्न ऊर्जा
२ – भवन की आतंरिक एवं बाहरी संरचना जो सूर्य आदि ग्रहो के द्वारा प्रदान की गई ऊर्जा को भवन में प्रवेश करने में सहयोग प्रदान कराती है अथवा रोकती है।
३- भवन में निवास करने वाले व्यक्तियों के आचार- विचार और व्यवहार आदि से उत्पन्न ऊर्जा
४- हमारे द्वारा कोई भी कार्य जिस समय प्रारम्भ किया उस समय के ग्रह , नक्षत्र , तिथि आदि के गुण तत्वों के मिलन से उत्पन्न ऊर्जा चेतन और अदृश्य है , परन्तु यही ऊर्जा हमारे चेतन तत्व को प्रभावित कर हमारी कार्य क्षमता और विचारो को प्रभावित करती है।
अतः उपरोक्त चारो प्रकार की ऊर्जा सकारात्मक बनी रहे , इसके लिए हमें
निवास करने के लिए स्थान , निर्माण , व्यवहार और मुहूर्त आदि का विचार करना चाहिए।
(उपरोक्त सभी प्रकार की ऊर्जा अचेतन और अदृश्य है है )
ग्रह नक्षत्रो के प्रभाव से निर्मित समय के अनुरूप कार्य (अर्थात मुहूर्त )
व्यक्ति
👉नक्षत्र – रेवती
👉चन्द्र – मीन
( आज जन्म लेने वाले बच्चो की राशि मीन होंगी
👉 अभिजित – 11:58 से 12:53
👉 राहुकाल – 08:59 से 10:42
👉 दिशा शूल – पूर्व
👉 अग्निवास- पाताल
सूर्योदय – 05:34
सूर्यास्त – 19:15
➡️दिन का चौघड़िया >
काल – हानि
05:33 से 07:16काल वेला
शुभ – उत्तम
07:16 से 08:59
रोग – अमंगल
08:59 से 10:42Rahu Kalam
उद्वेग – अशुभ
10:42 से 12:25
चर – सामान्य
12:25 से 14:09
लाभ – उन्नति
14:09 से 15:52वार वेला
अमृत – सर्वोत्तम
15:52 से 17:35
काल – हानि
17:35 से 19:18काल वेला
🌙रात्रि का चौघड़िया >
लाभ – उन्नति
19:18 से 20:35काल रात्रि
उद्वेग – अशुभ
20:35 से 21:52
शुभ – उत्तम
21:52 से 23:09
अमृत – सर्वोत्तम
23:09 से 24:25+
चर – सामान्य
24:25+ से 25:42+
रोग – अमंगल
25:42+ से 26:59+
काल – हानि
26:59+ से 28:16+
लाभ – उन्नति
28:16+ से 29:32+काल रात्रि
वास्तु कंसलटेंट
( 20 वर्षो से निरंतर )
वास्तुविद राकेश जैन हरकारा
( फ्यूचर वास्तु जयपुर)
,Mob- 9414365650
( परामर्श ऑफिस और फोन दोनों पर सशुल्क है )
