देशनोदय चवलेश्वर
*निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थक्षैत्रो के उद्धारक108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा
पर से जो भी काम करोओगे उसकी कीमत उतनी नहीं,पर जो तुमसे काम करायेगा उसकी कीमत ज्यादा होगी
1.भगवान से नहीं मांगना-भगवान से भी हमें अपने कार्य नहीं कराने चाहिए क्योंकि भगवान से कार्य कराना मेरा महादुर्भाग्य है पुज्य पुरुष को मैंने ढोक देने के लिए चुना है मैं अपनी जिंदगी में कोई कार्य नहीं कराऊंगा भगवान मैंने आपकी पूजा करने दर्शन करने के लिए भक्ति करने के लिए कर रहा हूं अपने काम नहीं कराने के लिए,शुगन बना लो मैं आप से मांगने नहीं आया हूं आपके दर्शन पूजन करके कार्य करने जाऊंगा तो मेरा मंगल हो जाएगा मैं कार्य में सफल हो पाऊंगा मैं अपने कार्य के लिए नहीं आया हूं मैं तो दर्शन पूजन करने आया हूं भगवान का नाम भी अपने संकट दूर करने के लिए नहीं लेना।
2.अहसान की किमत-जितना बड़ा ज्ञानी होता जाता है उतना उतना वह पर से संबंध कम करता जाता है पर से जो भी काम करोओगे उसकी कीमत उतनी नहीं पर जो तुमसे काम करायेगा उसकी कीमत ज्यादा होगी,एहसान की कीमत ज्यादा होती है जिंदगी भर एहसान जताता है मैंने ही तुझे बचाया है वह एहसान कहता है जिंदगी भर होता है यह।
3.साधु पर से अपना कार्य नहीं कराते-मुनि महाराज की तपस्या से महामारी आदि सभी कष्ट दूर हो जाते हैं वह बड़े आदमी साधु तपस्वी पुण्यात्मा है वो करते नहीं क्योंकि पर से काम कराने पर बहुत कुछ भुगतना पड़ता है बड़े आदमी से चुपचाप में सहायता ले लेना नहीं तो उनको बड़ा भुगतान करना पड़ता है।
4.सहयोग-जो परम प्रातव्य है शुद्ध दशा का दर्शन कुंदकुंद आचार्य कराते हैं तुमने सुख नहीं पाया सुखाभास कहा है यह पुद्गल सुख तो कम देते हैं लेकिन हम से ज्यादा लेते हैं। बड़े लोगों से काम नहीं कराना चाहिए क्योंकि बड़े लोगों से जब काम करवाते हैं तो बड़े लोगों को ज्यादा देना पड़ता है छोटे में काम हो जाता है इसलिए छोटे लोगों को बड़े लोग से अपना सहयोग नहीं कराना चाहिए।
प्रवचन से शिक्षा-पूज्य पुरुष भगवान को मेने पूजा दर्शन के लिए उपयोग करूंगा अपने कार्य कराने के लिए नहीं।
सकंलन ब्र महावीर 7339918672 परम गुरु भक्त 8मई2021
नमनकर्ता-अभिषेक पार्श्व शास्त्री सुधा जैन अनिल जैन,रीटा जैन अनिल जैन मानवी जैन नमन जैन प्रियंगसुंदरी वीरेश जैन मुनीश जैन करनाल नगर के मुलनायक बाबा चिंतामणि पार्श्वनाथ भगवान
पुज्य सुधासागर जी के प्रवचनांश व अमृत सुधावाणी के लिए जुडे
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