देशनोदय चवलेश्वर

देशनोदय चवलेश्वर मुनिपुंगव 108श्री सुधासागर महाराज बचन

देशनोदय चवलेश्वर
*निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव प्राचीन तीर्थरक्षक108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा
भक्ति जिसकी करनी है उसकी भक्ति में “ही”लगाना पड़ेगा”भी”में भक्ति नहीं बनेगी
1.संबंध गुरु पिता-हर संबंध चाहता ये मेरा बना रहे बेटा चाहता है पिता मेरा बना रहे पिता केवल बेटे का बना रहे,बेटे पिता के आगे भी नहीं लगा सकता है,शिष्य चाहता है गुरु मेरा बना रहे पिता केवल बेटे का बना रहे बेटा पिता के आगे भी नहीं लगा सकता ही “ही”लगाना पड़ता है पिता को बेटे के आगे भी लगाना है बेटे पिता के आगे भी कभी नहीं मिल सकते गुरु के सभी शिष्य हो सकते हैं शिष्य के केवल एक गुरु होते हैं हर आदमी कु ये भावना भाता है कि मेरा ही मेरे बारे में सोचें।
2.सबंध बाटना नहीं-हर व्यक्ति अपने संबंध को बांटने नहीं देना चाहता पिता और गुरु को अपने शिष्य बेटा दोनों चाहता है कि गुरु और पिता को बाटना नही चाहते संबंध वह किसी से बटे नहीं वह कोई को बाटना नहीं देना चाहता इसके लिए मर मीटते हैं उदाहरण पांडव और दुर्योधन का दिया भारत पाकिस्तान और गांधी जी का दिया इससे ही गांधी जी की मृत्यु की शुरुआत हो गई थी।
3.भक्ति-भक्ति जिसकी करनी है उसकी भक्ति में “ही”लगाना पड़ेगा भी में भक्ति नहीं बनेगी भक्ति अतिशयकारी नहीं होगी भक्ति सिद्धांत की कसौटी पर फेल होगी भक्ति में सब कुछ कह सकते हैं भक्ति में जिसकी भक्ति करते हैं वह कर्ता होता है प्रशंसा जितनी कर सकें अपनी ताकत लगा दे दुनिया में इनसे शक्तिशाली कोई नहीं वह भाव आएगा तब भक्ति सही है भगवान के पास जाओ तो भगवान सब कुछ है गुरु के पास जाओ तो गुरु सब कुछ है।
4.मोक्षमार्ग-जहां कांटे और झाड़ियों बहुत है मधुमक्खियां भी बहुत है मोक्षमार्ग कठिन नही मोक्षमार्ग का रास्ता कठिन है मोक्षमार्ग स्टेशन के बाद शुरू होता है सीधा मार्ग पर चलो मोक्ष मार्ग पर आने के बाद कुछ करना नहीं व्यक्ति जैसे तैसे धर्म करता जाता है बढ़ता जाता है धर्मात्मा बनता चला जाता है फिर उसके लिए मोक्ष मार्ग सीधा होता जाता है मोक्षमार्ग आसान होता जाता है जो कांटा निकालने जाता है उसके भी पैर गंदे होते हैं
5.बहु सास-हर बहू को अपने सास का उपकार मानना चाहिए सुहाग दिया मुझे पति भी दिया अपना बेटा दिया यह मानकर उसको सास का सम्मान करे,सासु से अपना कोई काम नहीं कराये,सास का काम करना हैं।
प्रवचन से शिक्षा-बाप का अपने बेटे पर उपकार है बेटे बहु को अपने माता पिता का उपकार मानना है।
सकंलन ब्र महावीर 7339918672 परम गुरु भक्त 4मई2021
नमनकर्ता-सुनील जैन प्रवीन जैन विनोद जैन,राजेश जैन,प्रधुम्न जैन,राजीव जैन,रवि जैन,अक्षत जैन,सिद्धांत जैन,राहुल जैन श्री नेमिनाथ जैन मंदिर सुरेंद्रनगर मुजफ्फरनगर
पुज्य सुधासागर जी के प्रवचनांश व अमृत सुधावाणी के लिए जुडे
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