⏱ दैनिक पंचांग ✍️

।।स्वाध्याय परमं तपः।। दैनिक जैन पंचांग

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👉वीर निर्वाण सम्वत -2547 -48 , विक्रम सम्वत – 2078
03 मई , 2021 सोमवार , वैशाख कृष्ण पक्ष, सप्तमी

👉 > 🪙 दिशा सूचक यन्त्र (कम्पास ) की सुई सदैव उत्तर दिशा में ही क्यों रहती है ?

समाधान – कम्पास की सुई की नोक पर मैग्नेटाइट नामक चुम्बकीय पदार्थ लगाया जाता है जो लैण्डस्टोन में पाया जाता है। यह चुम्बकीय पदार्थ उत्तरी चुंबकीय ध्रुव की और आकर्षित होता है। ☄️
👉 उत्तर दिशा में आर्कटिक महासागर के नजदीक चुम्बकीय ध्रुव तारा स्थित है , अन्य तारो की अपेक्षा धुव तारे की गति बहुत धीमी होती है।
👉अतः हजारो वर्षो तक भी यह पृथ्वी के उत्तर बिंदु पर ही स्थित रहेगा।
👉वहा 1 वर्ष में 6 महीने तक सूर्य की किरणे भी नहीं पड़ने से वहा की जलवायु अत्यधिक ठंडी होती है, और आर्कटिक महासागर में भी बर्फ की मोटी परते जमी रहती है। आर्कटिक महासागर को अंधमहासागर का उत्तरी छोर भी कहते है।

👉उत्तर दिशा इतनी ठंडी और जल से परिपूर्ण होने के कारण ही वास्तु नियमो में भवन आदि में जल का स्थान उत्तर दिशा में ही बनाना उचित माना गया है।

फैक्ट्री , भूमि , भवन आदि की एनर्जी टेस्ट करवाकर सही मार्गदर्शन प्रात करे।
👉नक्षत्र -उत्तराषाढा
👉चन्द्र – मकर
( आज जन्म लेने वाले बच्चो की मकरहोंगी

👉 अभिजित – 11:58 से 12:51
👉 राहुकाल – 07:26 से 09:05
👉 दिशा शूल – पूर्व
👉 अग्निवास- आकाश

सूर्योदय – 05:49
सूर्यास्त – 18:59

➡️दिन का चौघड़िया >

अमृत – सर्वोत्तम
05:47 से 07:26
काल – हानि
07:26 से 09:05काल वेला Rahu Kalam
शुभ – उत्तम
09:05 से 10:45
रोग – अमंगल
10:45 से 12:24
उद्वेग – अशुभ
12:24 से 14:03
चर – सामान्य
14:03 से 15:42
लाभ – उन्नति
15:42 से 17:22वार वेला
अमृत – सर्वोत्तम
17:22 से 19:01

🌙रात्रि का चौघड़िया >

चर – सामान्य
19:01 से 20:21
रोग – अमंगल
20:21 से 21:42
काल – हानि
21:42 से 23:03
लाभ – उन्नति
23:03 से 24:24+काल रात्रि
उद्वेग – अशुभ
24:24+ से 25:44+
शुभ – उत्तम
25:44+ से 27:05+
अमृत – सर्वोत्तम
27:05+ से 28:26+
चर – सामान्य
28:26+ से 29:46+

वास्तु एवं ज्योतिष कंसलटेंट >> ( 20 वर्षो से निरंतर )
राकेश जैन हरकारा ,Mob- 9414365650
( परामर्श ऑफिस और फोन दोनों पर सशुल्क है )

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