बिजाैलिया पार्श्वनाथ तपोदय तीर्थ पर दैनिक प्रवचन शृंखला में शुक्रवार काे मुनि पुंगव…
पार्श्वनाथ तपोदय तीर्थ पर दैनिक प्रवचन शृंखला में शुक्रवार काे मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने कहा कि जन्म किसी भी मुहूर्त व स्थान पर हो मृत्यु का स्थान और मुहूर्त शुभ होना चाहिए। हर जीव को यही भावना भानी चाहिए कि उसका मरण मंदिर तीर्थ या साधू-संतों के सानिध्य में हो। जब डाॅक्टर किसी रोगी के बचने की संभावना से इंकार कर दे तो उनके परिजनों को चाहिए कि जीवन के अंतिम समय में उसको सल्लेखना पूर्ण समाधि लेने दें, ताकि वह ईश्वर का स्मरण करते हुए मुक्ति पा सके। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य की सफलता उसकी अच्छी शुरूआत पर निर्भर करती है। अतः दिन की शुरूआत मंदिर में दर्शन, पूजा व अभिषेक के साथ करें ताकि आपका दिन और जीवन सफल हो सके। आज व्यक्ति दुखी अपने व्यसनों के कारण ही है। यदि हम किसी व्यसन का सेवन कर लेते हैं तो बर्बादी निश्चित है।
धर्म समाज
मुनि नमित सागर के देवलोकगमन पर नवकार महामंत्र का जाप किया … गुलाबपुरा | दिगंबर जैन मुनि नमित सागर महाराज के कर्नाटक के यरनाल में देवलोक गमन होने पर दिगंबर जैन समाज ने विनयांजली दी। दिगंबर जैन मंदिर में मुनि के अर्घ समर्पित कर उनके चित्र के समक्ष नवकार महामंत्र का जाप किया। मुनि ने आचार्य वर्धमान सागर से मुनि दीक्षा ली। मुनि तपस्वी संत थे। उनका जन्म कोठियां में हुअा था। मुनि बाल ब्रह्मचारी थे। उन्होंने सोलह कारणजी के कई बार उपवास किए। इस अवसर पर महावीर बिलाला, रतन कुमार जैन, सीपी वैद, मांगीलाल सेठी, कुंदनमल पाटनी, नवीन शाह, एनके जैन, प्रवीण बाकलीवाल, प्रेमचंद पाटनी अादि उपस्थित थे।
बिजौलिया. धर्मसभा में संबोधित करते सुधासागर महाराज।
पर्युषण पर्व में श्रावक संस्कार शिविर के दौरान अभिषेक व शांतिधारा के लिए कस्बे के बीस पंथी बड़ा मंदिर व नया मंदिर से लाई गई प्रतिमाएं शुक्रवार काे तपोदय तीर्थ से पुनः मंदिरों में विराजित की गई। उल्लेखनीय है कि बड़ा मंदिर की चंद्रप्रभु भगवान की प्रतिमा शिविर का मुख्य आकर्षण रही। जिस पर श्रावकों ने अभिषेक व शांतिधारा की।
93 वर्षीय श्वेत पिच्छीधारी दिगंबर जैन आचार्य विद्या नंद महाराज की दिल्ली में चल रही सल्लेखना की अनुमोदना करते हुए मुनि सुधासागर ने उन्हें महान संत बताया। उनकी उत्कृष्ट समाधि की प्रार्थना करते हुए श्रावकों से णमोकार मंत्र की माला फेरने की अपील की।
