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💐💐 5️⃣4️⃣वाँ जन्म दिवस 💐💐💐
1️⃣7️⃣ अप्रैल 2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣ ╰══════════════╯
🔹 परम पूज्य संत शिरोमणि दिगम्बर🔹
🔹 सरोवर के राजहंस आचार्य🔹
🔹 श्री १०८ विद्यासागर महाराज जी🔹
के पावन आशीर्वाद से पुज्य गुरुदेव के
परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य
✡ परम पूज्य प्रशममूर्ति,मुनिश्री ✡
✡ १०८ अजितसागर महाराज जी ✡
का आज अंग्रेजी तारीख अनुसार दिनाँक
17-04-2021 को 54वाँ जन्म दिवस है आज,इस शुभ दिन को मुनिश्री का जन्म हुआ था. बुंदेलखंड की वह रत्नगर्भा वसुंधरा जिसने अनेक महान विद्वानों,आत्माओं को जन्म दिया।उसमें सागर जिले के छोटे से ग्राम सिमरिया ,गढ़ाकोटा जिला सागर(मप्र) में
पिता श्री कोमलचंद जी जैन ,माता श्रीमती ताराबाई बाई जैन जी की कुक्षी से एक बालक ने जन्म लिया.17 अप्रैल 1968 के दिन जन्म के शुभ अवसर पर सिमरिया ग्राम में खुशियों में कई बुलाऊया हुऐ.खूब बधाईयाँ हुई रिस्तेदारो को भेंट दी गयी सभी को यथा योग्य सम्मान दिया गया सभी की खुशियां देखते ही बन रही थी और इन्ही खुशियों के बीच पलते हुए बालक जिसका नाम विनोद रखा गया खेलते कुंदते बड़े होने लगे.आपका बचपन सिमरिया ग्राम की गलियों में हँसते खेलते,अठखेलियाँ करते गुजरा तब कौन जानता था कि यह विनोद एक दिन कर्म मलों को क्षय करने के निमित्त विनोद जैन से मुनि श्री 108 अजितसागर जी बन जाएगे. छोटी सी उम्र में ही अपने दोस्तों के बीच बड़ो जैसा व्यवहार उन्हें अलग से सम्मान दिलाता था ,, धीरे धीरे समय बीतता गया विनोद बड़े हो गए रुचि के अनुसार पठन पाठन का कार्य करते हुए पाठशाला जाना भी दैनिक दिनचर्या में शामिल होगया,समय बीते समय नही लगता आचार्य विद्यासागर जी के दर्शनों का सौभाग्य मिला और सौभाग्य भी ऐसा कि उन्हें तो बस स्वप्न में भी आचार्य भगवंत ही दिखाई देते थे ,बालक विनोद भी उन्हें अपना गुरु मानने लगे थे बस थोड़ी हिम्मत नही हो रही थी सो कुछ साधना घर पर ही करते हुए माँ पिताजी का ध्यान अपनी और आकृष्ठ करने लगे ताकि उन्हें इस बात का अहसास हो जाए कि बालक विनोद का मन अब दुनिया में नही बल्कि दुनिया बनाने वाले की तरह बनने का हो रहा है,आचार्य भगवंत के पास जाकर अपनी भावना बताई और फिर बस कुछ ही समय बीतने के बाद जब तन से वस्त्रों का बोझ नही सह पाने की भावना को आचार्य भगवंत ने अपने ज्ञान से जान लिया उसी दिन उन्होंने दिगम्बर जेनेस्वरी क्षुल्लक दीक्षा प्रदान कर विनोद से क्षुल्लक 105 प्रज्ञासागर जी के नाम से जीवन को सफल बनाने का आशीर्वाद दे दिया,,आपने गुरु आशीष से सब जगह अपूर्व जिनधर्म की प्रभावना करते हुऐ, हमेशा गुरु आज्ञा को सब कुछ माना आपके द्वारा उच्चारित मंगलाचरण जिसमें गुरुभक्ति मानों स्वर्णिम शिखर को छूती है,, आज वर्तमान में आचार्य भगवन के बाद आप उपसंघ का नेतृत्व कर रहे है, सरलता ,सहजता,सौम्यता की आप प्रतिमूर्ति हो आप अधिकतम समय ध्यान में लीन रहते है और आत्मा का चिंतन चलता रहता है आपकी वाणी ओजस्वी मनस्वी प्रशस्वी यशस्वी है जब आप की वाणी खिरती है तो मानो ऐसा लगता है जैसे वीणा के झनकार बजा रहे हो।। आपके उपसंघ में पूज्यवर श्रद्देय ऐलक श्री १०५ दयासागर जी महाराज ,श्रद्देय ऐलकश्री१०५ विवेकानंदसागरजी महाराज ,,क्षुल्लक १०५ प्रशम सागर जी महाराज,ब्रह्मचारी रविन्द्र भैया जी कोटा ,ससंघ,,साथ समूह में रहकर गुरु आज्ञा का पालन कर मोक्ष मार्ग में सहयात्री है ।। विशेष आपके उपसंघ की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि साधुओं का परस्पर वात्सल्य अद्वितीय है।। आप के ससंघ सानिध्य में कई स्थानों पर ऐतिहासिक पंच कल्याणक सम्पन्न हुए ,जैसे की, सेसई जी (शिवपुरी)गंजबासौदा,विदिशा,बैरसिया,गढ़ाकोटा,गोटेगांव, आदि अनेको उदाहरण है आप के आशीर्वाद से बहुत स्थानों पर नवीन मंदिर निर्माण और जीर्णोद्धार कार्य,चल रहा है।
आपके आशीर्वाद से स्वर्ण दीक्षा दिवस पर कीर्ति स्तंभ का निर्माण कार्य चल रहा है जिसमें , गंजबासौदा, विदिशा,सतना, शिवपुरी, मुंगावली,विशेष उल्लेखनीय है…
🙏गुरुचरणों में समर्पित कुछ पंक्तिया
गुरूवर तेरे चरणों की, गर धूल जो मिल जाये
सच कहता हूं मेरी, तकदीर संवर जाये..
सुनते हैं दया गुरू की, दिन रात बरसती है
इक बूंद जो मिल जये, कली दिल
की ये खिल जाये, गुरूवर तेरे …
यह मन बड़ा चंचल है, कैसे प्रभु ध्यान धरूं,
जितना इसे समझाओ, उतना
ही मचल जाये, गुरूवर तेरे ..नज़रों से
गिराना नहीं, चाहे जितनी सज़ा देना,
नज़रों से जो गिर जाये, मुश्किल है
संभल जाये, गुरूवर तेरे …मेरे इस
जीवन की, बस एक तमन्ना है,
तुम सामने हो मेरे, और प्राण
निकल जाये, गुरूवर तेरे ..
गुरूवर तेरे चरणों की, गर धूल जो मिल जाये
🙏 आज के इस शुभ अवसर पर पुज्य मुनिश्री जी के पावन चरणों में मेरी ओर से,एवं मेरे समस्त परिवारजनों की ओर से, बारम्बार नमोस्तु,नमोस्तु,नमोस्तु,नमोस्तु🙏
हम सभी यही भावना भाते है कि
मुनि श्री ऐसे ही अपनी साधना से
अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त करे
जिनकी तप की चर्चा चारों ओर है,ऐसे ,
भविष्य के महावीर को प्रणाम करता हूं
पूज्य गुरुजी ,, देना चाहता हूँ,जो कुछ अलग हो
कुछ खास हो,,और हमेशा आपके साथ हो
पर क्या ….! जो एक भक्त,अपने गुरु
को दे सके, कुछ मिलता ही नहीं ,,,
कोई कविता नहीं,,,कोई गिफ्ट नहीं
और आप कुछ लेते भी तो नही सिर्फ
देते हो वात्सल्य उपदेश आशीष इसलिए
सिर्फ और सिर्फ चरणों में शत शत नमन
🙏 गुरु चरणों में बारम्बार नमोस्तु,🙏
🙏 गुरु चरणों में समर्पित ,मुनिश्रीजी के,
चरणों में बारम्बार नमोस्तु,नमोस्तु,🙏
🙏🙏🙏 नमनकर्ता 🙏🙏🙏
राजेश-रजनी रिया,रीतेश-पूजा,प्रशिमा मिडला
(पारले-जी डैली नीड्स बीना)
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