
🎷🎷 *सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र का इतिहास*🎷🎷
🙏🏼 नेमावर एक सिद्ध क्षेत्र भूमि है यहां से साडे पांच करोड़ मुनि महाराज निर्माण को पधारे हैं *नेमावर भूमि*सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र कैसे बनी है* नर्मदा बेतवा नदी का विशाल रूप है जब भगवान तीनों तीर्थंकरों का विराट रूप लिए इस नर्मदा जी में विराजमान थे जब गांव के एक किसान को देवों ने सपना दिया कि बेतवा नदी में तीन जैन भगवान विराजमान है यह सपना देखकर सुनकर चौक गया फिर उसको 3 दिन बाद दोबारा सपना दिया डरो मत आपको भगवान ढूंढने की जरूरत नहीं है ऐसा कर न टोकरी से भरे फूल को नदी में छोड़ दो जहां टोकरी डूब जाए वही पर भगवान मिल जाएंगे उसने ऐसा ही किया और तीनों गांव वालों को खबर भेज दी पूरे आसपास के जैन समाज आ गया और वहीं पर खोजना चालू कर दिया और अतिशय कारी तीनों भगवान निकल आए फिर क्या था कि तीनों गांव वालों में लड़ाई चालू हो गई कि भगवान हम ले जायेंगे हम ले जायेंगे वह के राजा को खबर मिली तो बो भी वहां पर पहुंच गया और उन्होंने फैसला किया कि *भगवान को कहां जाना है भगवान के ऊपर सौंप दो* उसके बाद जैन समाज ने पूछा वह कैसे फिर राजा जी बोले कि तीन बैल गाड़ी मंगवाओ और तीनों गाड़ी में भगवान को विराजमान करके छोड़ दो बिना सारथी के चलने दो और जहां पर भगवान को जाना होगा वही गाड़ी खड़ी हो जाएगी और ऐसा ही हुआ तीनों गाड़ी साथ में चली और पहली गाड़ी जिसमें अतिशय कारी *पारसनाथ भगवान* विराजमान थे वह *नेमावर* मैं जाकर रुकी और दूसरी गाड़ी जिसमें *मुनिसुव्रतनाथ भगवान* विराजमान थे वह *खातेगांव* में जाकर रुकी और तीसरी गाड़ी जिसमें *शांतिनाथ भगवान* विराजमान थे वह *हरदा* में जाकर रुकी उसके बाद वहीं पर विशाल जिनालय राजाओं के द्वारा और समाज के सहयोग से बने ऐसी विशाल सिद्ध भूमि पर आचार्य श्री जी ने चतुर्मास किया जो कि मनोहारीय सिद्ध उदय सिद्ध क्षेत्र भूमि है जहां तक ध्यान करने में मन लगता है
साभार: *विनोद जैन अकझिरि, गुना।।।*
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✍🏼 मेरे गुरुवर मेरे भगवान ✍🏼
🇮🇳 इंडिया नही भारत बोलो🇮🇳
