
जैन संत समाचार:- नेगरून ( जैन तीर्थंकर महावीर स्वामी या भगवान बुद्ध ) उज्जैन से 110 किलोमीटर दूर ताल तहसील मुख्यालय से6किलोमीटर दूर पक्की सड़क पर स्थित हैं । आलोट तहसील से 20 किलोमीटर ओर रतलाम जिला मुख्यालय से72 किलोमीटर दूर , यह गांव स्थित हैं । सूचना मिली थी । कि यहां पर बोद्ध धर्म से सम्बंधित कुछ अवशेष मिले हैं । जानकारी के । आधार पर में , मैने इस गाँव का सूक्ष्म निरीक्षण किया है । जिसकी रिपोर्ट यह है । ताल पहुँच कर में , सूचनार्थी व्यक्ति से मिला , यहां से हम लोग गंतव्य स्थान पर जा पहुंचे , यहां पर एक स्थम्भ मिला जो शायद भवन निर्माण कार्य के दौरान नीव खोदते समय निकला था । गाँव वालों की माने तो यह स्थम्भ करीब गर्मियों में ही निकाला गया था । जब से गाँव वाले किसी पुराविद की तलाश में थे । इसकी जानकारी तहसील कार्यालय को देदी गयी थी । मेरे वहां पहुंचने पर मैने स्थम्भ की बारीकी से निरीक्षण किया , ओर सफ़ाई भी की , यह स्थम्भ काले पत्थर से बना हुआ है । इसकी लंबाई 71 इंच है और गोलाई 45 इंच है । इस पर चारों ओर स्थम्भ के ऊपरी भाग में बुद्ध की ध्यान मुद्रा में उत्तकीर्ण प्रतिमाएं बनी हुई है । बुद्ध आसन लगाए बैठे है । ठीक उनके नीचे सुंदर कलाकृति बनी हुई है , बुद्ध की प्रतिमा के ऊपरी भाग पर भी तोरण बना हुआ है । स्थम्भ ऊपरी भाग में चौखट जैसा है , नीचे गोल है । प्रतिमा के ठीक नीचे की ओर एक लेख भी उत्तकीर्ण है जो बहुत ज्यादा अष्पस्ट है । जिस स्थान पर यह मिला है वह पर ओर भी स्तम्भ मिलने की संभावना है । जब गांव को ओर बारिकी से देखा तो जगह जगह अनगढ़ पत्थरों की प्रतिमाएं दिखाई देती हैं । । आश्चर्य तो जब हुआ जब यहाँ पर एक बरगद के पेड़ के नीचे कुछ दैवी देवताओं की प्रतिमाएं भी देखी , ये प्रतिमाएं ओर बुद्ध स्थम्भ दोनों के पत्थरों ‘ में अंतर है , जो दैवी देवता की प्रतिमा का पत्थर है वह हल्का कला जिसमें भुरे चमकीले दाने है , यहां पर यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है । कि स्थम्भ , ओर दैवी देवताओं की प्रतिमाओं का कालखंड अलग है ।
