धर्म नगरी आयोध्या के इतिहास में निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज स संघ का भव्य मंगल प्रवेश

JAIN SANT NEWS अयोध्या

आयोध्या और सम्मेदशिखर का अपने आप में शास्वत सम्वंध है”-निर्यापक श्रमण समतासागर महाराज

धर्मनगरी आयोध्या के इतिहास में वह स्वर्णिम पल आ ही गया जब आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागरजी महाराज के परम प्रभावक शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज मुनि श्री पवित्रसागर महाराज, मुनि श्री बासूपूज्यसागर महाराज, मुनि श्री अतुलसागर महाराज, ऐलक श्री निश्चयसागर महाराज, ऐलक श्री निजानंद सागर महाराज
क्षु. संयम सागर महाराज स संघ का मंगल आगमन श्री आदिनाथ दि. जैन मंदिर में शनिवार को मध्यान्ह में हुआ क्षेत्र पर विराजमान गणनी आर्यिकारत्न ज्ञानमति माताजी एवं चंदनामति माताजी स संघ आर्यिकाओं ,तथा क्षेत्र पर प्रवासकाल में विराजमान आर्यिका रत्न गुरुमतिमाताजी आर्यिका रत्न दृणमति माताजी स संघ 54 आर्यिकाओं ने तथा कर्म योगी रविन्द्र कीर्ति स्वामी जी तथा यंहा पर उपस्थित धर्म श्रद्धालुओं ने गाजेबाजे के साथ मंगल अगवानी की एवं विशेष अभिवादन किया, मुनि संघ ने जिनालय की बंदना की एवं मंच पर विराजमान हुये।

इस अवसर पर गणनी आर्यिका ज्ञानमति माताजी ने तीर्थंकर भगवंतों की परंपरा का उल्लेख करते हुये आचार्य शांतिसागर,आचार्य वीरसागर आचार्य ज्ञानसागर महाराज का उल्लेख करते हुये खुरई में आचार्य विद्यासागर जी महाराज के दर्शन का उल्लेख करते हुये कहा कि मुझे वह क्षण आज भी याद है,जब आचार्य श्री ने भाई बहन का उल्लेख किया था आज उसी परंपरा में मुनिसंध का मंगल आगमन हम सभी के लिये सुखदायी एवं मंगलकारी है, जिनशासन निरंतर आगे बड़ता रहे ऐसी उन्होंने मंगल कामना की इस अवसर पर निर्यापक श्रमण समतासागर महाराज ने कहा कि श्री सम्मेदशिखर तीर्थराज पर मुनिसंध एवं आर्यिकासंघ का चातुर्मास संपन्न हुआ,उन्होंने कहा कि आयोध्या और श्री सम्मेदशिखर तीर्थराज का शास्वत सम्वंध है,आयोध्या में आकर के श्री सम्मेदशिखर तीर्थराज की यादें ताजा हो गई हैउन्होंने कहा कि इस तरफ विहार करके हम सभी ने ज्ञानमति माताजी के परिश्रम को देखा उन्होंने जो साहित्य सृजन किया है वह अभिनंदनीय है,मुनि श्री ने कहा कि जब माता जी बुन्देलखण्ड की यात्रा पर थी तो उन्होंने आचार्य गुरुदेव के परिश्रम को देखा था तथा कुंडलपुर के बड़ेबाबा के दर्शन करके माताजी को अपार आनंद की अनुभूति हुई थी उन्होंने कहा कि आर्यिका ज्ञानमति माताजी को पिच्छिका के साथ में लगभग 74 वर्ष संयम के हो चुके है,जब हम लोग शिखरजी में थे तो वंहा पर आपकी अस्वस्थता का समाचार मिला तो मन में भाव था कि पंच तीर्थों की यात्रा करते हुये आगे बड़ेंगे तो आयोध्या जी पहुंचकर माताजी के स्वास्थ समाचार को भी देखेंगे उन्होंने कहा कि कर्मयोगी रविन्द्र कीर्ति जी गुरुभक्त तथा मुनिभक्त है तथा उनके स्नेह की डोर से वंधकर ही हम सब यंहा तीर्थंकरों की कल्याणक भूमी की बंदना करने आये है।

मुनि श्री ने कहा कि आर्यिका गुरुमतिमाताजी एवं आर्यिका दृणमतिमाताजी सहित आर्यिकासंघ विगत चालीस वर्षों से देश के विभिन्न प्रांतों में चातुर्मास करके धर्म की प्रभावना करते हुये यंहा तक आई है,ये ऐतिहासिक पल है जिनका सभी को इंतजार था मुनि श्री पवित्रसागर महाराज ने कहा कि यह आयोध्या नगरी तीर्थंकरों की पवित्र भूमी है।

मुनि श्री बासूपूज्यसागर महाराज ने आर्यिका ज्ञानमति माताजी के साहित्यिक योगदान का उल्लेख करते हुये कहा कि उन्होंने अपने जीवन काल में धर्म की बहूतप्रभावना की इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन करते हुये कर्मयोगी रविन्द्रकीर्ति स्वामी ने आर्यिका ज्ञानमति माताजी के बचपन से लेकर बैराग्य तक के समस्त प्रसंगों को सुनाया एवं मुनिसंघ एवं आर्यिका संघ के आगमन पर प्रसन्नता व्यक्त की इस अवसर पर मुनि संघ के साथ तथा आर्यिकासंघ के साथ विहार करा रहे सैकड़ों की संख्या में भक्त श्रद्धालुओं ने गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागरजी महामुनिराज एवं आर्यिका ज्ञानमति माताजी एवंआर्यिका संघ की जयजयकार की प्रवक्ता अविनाश जैन ने जानकारी देते हुये बताया इस अवसर पर दिल्ली, कटनी, खातेगांव, अशोकनगर, जबलपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, बनारस, गया तथा आसपास के श्रद्धालु बड़ी संख्या में मौजूद थी।

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