अहंकार और विश्वास में बहुत अंतर है अहंकार में व्यक्ति ग़ाफ़िल होकर विनाश को प्राप्त हो जाता है– निर्यापकाचार्य मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज

JAIN SANT NEWS

पंच कल्याणक महा महोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ हेतु निलांजन का किया जाएगा चयन

शहर के सबसे प्रचीन जिनालय के साथ गंज मन्दिर के प्रभु की होगी प्रतिष्ठा –विजय धुर्रा

अहंकार और विश्वास में बहुत अंतर है अहंकार में व्यक्ति ग़ाफ़िल होकर विनाश को प्राप्त हो जाता है इस संसार में रावण से बढ़कर कोई धनवान नहीं हुआ तो अहंकार भी उसका उतना ही भारी था लेकिन जव सामने विश्वास से भरे श्री श्री राम आये तो रावण का भी अहंकार टिकना सका मुझे विश्वास है कि मेरे पति एक दिन आयेंगे और मुझे इस दुष्ट के वंधन से मुक्त कराये सतिसीता इसी विश्वास ने काम किया और श्री राम ने समुद्र को भी विश्वास के वल पर बांध कर लंका विजय की तो विश्वास बहुत बड़ी चीज है इसे बनाये रखना चाहिए उक्त आश्य केउद्गार सुभाषगंज मैदान में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने व्यक्त किए ।

एक साथ चार चार जिनालयों की होगी प्रतिष्ठा

इस दौरान जैन समाज के मंत्री विजय धुर्रा ने कहा कि वर्षों वाद नगर में हो रहे श्री मद् जिनेन्द्र पंच कल्याणक महामहोत्सव एवं विश्व शांति महायज्ञ में शहर के सबसे प्राचीन गांव मन्दिर के साथ ही गंज मन्दिर पार्श्वनाथ मन्दिर एवं श्री शांतिनाथ त्रिकाल चौबीस जिनालयों की प्रतिष्ठा निर्यापका चार्य मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में प्रतिष्ठा चार्य प्रदीप भ इया के निर्देशन में होने जा रही है इस महा महोत्सव निलांजन का चयन किया जाना है इस हेतु आप अपने नाम हम तक पहुंचा दे अंतिम निर्णय वाल ब्रह्मचारी प्रदीप भ इया जी का होगा इस दौरान जैन अध्यक्ष राकेश कासंल उपाध्यक्ष अजित वरोदिया प्रदीप तारई राजेन्द्र अमन महामंत्री राकेश अमरोद कोषाध्यक्ष सुनील अखाई मंत्री शैलेन्द्र श्रागर मंत्री विजय धुर्रा मंत्री संजीव भारिल्य मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार आडिटर संजय के टी संयोजक मनोज रन्नौद उमेश सिघई मनीष सिंघई श्रेयांसघैला थूवोनजी अध्यक्ष अशोकजैन टींगूमिल महामंत्री मनोज भैसरवास विपिन सिंघई अन्य प्रमुख जनों द्वारा घट यात्रा कलशों का प्रदर्शन किया गया ।

मेरे दिमाग ने ना जाने कितने लोगों की जिंदगी बचाई क्या ऐसा कोई काम किया है

उन्होंने कहा कि इस प्रथ्वी पर हम भार है या सौभाग्य है अपने आप की क्या कीमत है क्या तुम्हें महसूस किया कि मैं बहुत कामका हूं मेरे दिमाग ने ना जाने कितने लोगों की जिंदगी बचाई क्या ऐसा कोई काम किया कि जगत आपकी कीमत कर रहा है परिवार में तुम्हारी क्या अहमियत है आपने ऐसा कोई काम किया कि परिवार की आपकी कुटुम्ब का मान सम्मान बढ़ता चला गया तुम कहते हो तुम धर्मात्मा हो तुम्हरे विना धर्म विकलांग हो जाये क्योंकि धर्म धर्मात्मा विना चल नहीं सकता क्या तुम धर्म के काम किया क्या तुमने ऐसा धर्म किया कि धर्म आपके कारण धर्म आगे बढ़ ऐसा अंदर से भाव आना चाहिए यदि आप ने अपनी अच्छाइयां पहचान लिया

धर्म बहुत आगे कि बात है थोड़ी तुम्हारे प्रति कूलता हुई कि तुम गुरु वदल लेते हो

उन्होंने कहा आप ने गुरु महाराज को हजार नमोस्तु किया और आशीर्वाद नहीं मिला तो आप तपस्वी हो गुरु ने आपको तपस्या रूप प्रायश्चित दे दिया हमें मान लेना चाहिए फिर देखना एक दिन ऐसा भी आयेगा कि तुम्हारे लिए सदा टाइम मिलता रहेगा क्या समझ रखा है गुरु को , गुरु तुम्हारी प्रशंसा करेंगे गुरु हमारे काम को सराहा।

धर्म बहुत आगे कि बात है थोड़ी तुम्हारे प्रति कूलता हुई कि तुम गुरु वदल लेते हो लोग तुम्हारे से बोलने को तरसते है और गुरु वोले नहीं यदि आप केमन में ये भाव आ गया कि गुरु कभी मेरा अहित नहीं कर सकते गुरु तो मेरे परम उपकारी है तुरंत तुम्हारे मन में भाव आना चाहिए कि गुरु तुम्हारे मन में भाव आये कि गुरु मेरे परम हितैषी है वे तुम्हारा बुरा विचार ही कर सकते रानी लक्ष्मीबाई अपने बेटे को पीठ पर वादे थी जव लक्ष्मीबाई ने बेटे से पूछा कि बेटा तुझे ऐसा बेटा वनने के लिए दामोदर वनना पड़ेगा ऐसा वनने के लिए श्री राम वनना पड़ेगा

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