भक्ति भाव से श्रद्धालु ले रहे हिस्सा, किये जा रहे अनेक अनुष्ठान

JAIN SANT NEWS सलेहा


आर्यिका विन्घ्य श्री माताजी के जन्मदिवस पर दो दिवसीय कार्यक्रम

सलेहा। परम पूज्या भारत गौरव गणिनी आर्थिका गुरु माँ 105 विन्ध्य श्री माता जी के मंगल सानिध्य में सलेहा नगरी इन दिनों भक्ति और संस्कारों के स्वर्णिम आलोक से जगमगा रही है। अवसर है उनकी संघस्थ आर्यिका 105 विद्वत श्री माता जी के 50वें जन्मदिवस का, जिसे जैन समाज ने 16 और 17 नवम्बर को विद्वत स्वर्णोत्सव के रूप में द्वि-दिवसीय कार्यक्रम के साथ मनाया। इस अवसर पर न केवल भव्य धार्मिक अनुष्ठान हुए, बल्कि एक ऐसे सामाजिक संस्कार का सूत्रपात भी हुआ, जिसकी गूंज दूर- दूर तक सुनाई देगी।

माता-पिता के चरणों में कृतज्ञता के सात फेरेः स्वणर्णोत्सव का पहले दिन कामदगिरी मैरिज गार्डन, देवेन्द्रनगर रोड, सलेहा में प्रातः 8.00 बजे से जन्मदाता अभिनंदन उपकार स्वं दाम्पत्य जीवन संस्कार के सात फेरे नामक प्रथम अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अभिनव कार्यक्रम की प्रेरणा देते हुए पूज्य गुरु माँ विन्ध्य श्री माता जी ने बताया कि जन्मदाता माता पिता के उपकारों का बदला जीवन में कभी भी चुकाया नहीं जा सकता।

उनकी इस प्रेरणा से प्रेरित होकर, सभी सहभागी श्रावकगणों ने अपने माता पिता के सात फेरे लगाकर, उनके चरणों का प्रक्षालन किया। यह पल हर किसी के लिए अत्यंत भावुक और अलौकिक था, जहाँ पुत्र-पुत्रियों ने अपने माता पिता के प्रति कृतज्ञता की एक ऐसी संपदा प्राप्त की, जिसका वर्णन शब्दों में सीमित नहीं है।

पूज्य गुरु माँ ने इस अनुष्ठान में स्वयं माता-पिता के प्रति कृतज्ञता दर्शाने हेतु सून प्रदान की। साथ ही, दाम्पत्य जीवन में आने वाले व्यवधानों के निवारण हेतु ऐसे व्यावहारिक टिप्स दिए, जिससे हर एक घर में खुशियों का वातावरण छा गया। इस कार्यक्रम को जैन समाज के परिवारों में एक नया संस्कार और नयी ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जा रहा है।

स्वर्णोत्सव के दूसरे दिन 17 नवम्बर को पूज्य आर्यिका 105 विद्वत श्री माता जी का 50वां विदत स्वर्णोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जायेगा। इस पावन अवसर पर प्रातःकाल पहली बार 50 जिनेन्द्र भगवान की एकसाथ शांतिधारा एवं अभिषेक किया जायेगा। इस महाअनुष्ठान का लाभ लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रावक समाज कार्यक्रम में सम्मिलित होगा।

सलेहा जैन समाज ने इस स्वर्णिम महोत्सव को अविस्मरणीय बनाने के लिए घर-घर में रंगोली, तोरण द्वार आदि से पूज्य माता जी (ससंघ) का भव्य अभिनंदन और स्वागत किया। पूरी नगरी में एक स्वर्णिम और भक्तिमय माहौल सा प्रतीत हो रहा है। यह द्विदिवसीय कार्यक्रम न केवल पूज्य आर्थिका विद्वत श्री माता जी के प्रति समाज की असीम श्रद्ध को दर्शाता है, बल्कि गुरु माँ विन्ध्य श्री माता जी द्वारा दिए गए सामाजिक और पारिवारिक संस्कारों के महत्व को भी स्थापित करत है।

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