मेरी बात कभी मत मानना लेकिन सुनना ज़रूर सही लगें तो निर्णय करना–मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज

JAIN SANT NEWS टीकमगढ़

मेरी बात कभी मत मानना लेकिन सुनना ज़रूर सही लगें तो निर्णय करना–मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज

टीकमगढ़–

आपका मन विगड़ने लगें बिगड़ जाऐ और आप किसी को बताते तक नहीं आप कहते हैं महाराज जी का तो काम कहना है चलो कोई बात नहीं शक्ति तसं त्यागा जितनी शक्ति है उतना त्याग करें। जैन दर्शन ने कभी जबरदस्ती नहीं कराईं। महावीर के पास तो सौधर्म इन्द्र उनकी सेवा में थे कर सकते थे।

तानाशाही डंडे के बल पर झुका सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।आप लोग मेरी बात कभी मत मानना लेकिन सुनना ज़रूर फिर विचार करना निर्णय तुम्हें खुद करना है यदि सही है तो मानना जरुर। महावीर ने आदेश दिया जो सत्य है।वह महावीर ने कहा है यदि ये अनुभव में आ जाऐ कि महाराज सत्य बोल रहें।बस इतना स्वीकार कर लो कि महाराज ने कहा वह सत्य है रात्रि भोजन छोड़ने योग्य है मैं नहीं कर पा रहा मेरी कमी है ये बेटे से कहना कि मेरी करनी गलत है।शास्त्रों में जो लिखा है वहीं सत्य है। यह उद्गार नंदीश्वर मैदान टीकमगढ़ में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागर महाराज ने व्यक्त किए।

महा महोत्सव के मुख्य पात्र बनने का इन्हें मिला सौभाग्य

मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने बताया कि आदिनाथ धाम त्रिकाल चौबीसी का पंचकल्याणक महा महोत्सव 17 फरवरी से 23 फरवरी तक होने जा रहा है महोत्सव में भगवान के माता पिता बनने का सौभाग्य श्रीमती पुष्पा देवी गुलाब चंद जैन को मिलेगा पात्र चयन प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप सुयश की उपस्थिति में हुआ। जहां सौधर्म इन्द्र जिनेंद्र कुमार ककङारी, कुबेर विमल जैन मालपीथा,महा यज्ञ नायक रमेश चंद्र जैन जतारा,भरत चक्रवर्ती एवं बाहुबली संजय जैन एवं राजीव जैन मडावरा वाले ईशान इंद्र अशोक जैन अस्तौन बाले सानत कुमार इंद्र बाल चंद अतुल कुमार जैन सेल सागर माहेंद्र इन्द्र शील चंद जैन जैन सजावट राजाश्रेयांश का सौभाग्य गजेंद्रजैन लुईसचौधरी को राजासोम विमलजैन को,
मूलनायक आदिनाथ भगवान की प्रतिमा का सौभाग्य राजकुमार जैन राजीव जैन पार्षद यज्ञनायक एवं विधि नायक की प्रतिमा का सौभाग्य राजकुमार जैन राजीव जैन पार्षद बड़माङई परिवार को प्राप्त हुआ

बडों से अपनी ग़लती सब छिपाते हैं

मुनि पुंगव ने कहा एक ऐसा कार्य जो हमने गुरु माता पिता से छिपाई हैं।हमने अपनों से कोई न कोई बात जरूर छिपा रहे है।हमने गुरु के प्रवचन सुने उनकी बात को नही मानतें इसका मतलब हम गुरु को क्या मानते हैं, यदि गुरु की बात नही मान पाते लेकिन उनकी बात को स्वीकार करो मान नही पाते ये हमारी कमजोरी हैं गुरु की बात तो सही है ये मानना है।
पेट भरने के बाद पेट भर गया ये कहना कोई बड़ी बात नहीं, और पेट खाली रहने के बाद भी पेट खाली का अहसास नही और उपवास कर लेना साधना यही हैं, जल से भिन्न कमल हैं,कोई प्रिय वस्तु आ गयी मुझे आकर्षित नहीं कर सकता है,जिंदगी में जो भी आता है उसको सब नाटक मानता है ये सब नाटक के पात्र है नाटक देखो मत देखोगे तो उसमें आप सही में आप नाटक के अनुसार चलने लगते हैं।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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