बड़ी सर्दी है ठिठुरन है,

ओस निरंतर जारी हैना पूछो रात कल की किस तरह गुज़ारी हैवहाँ पर कम्बलों में स्वेटरों में देह कंपती हैयहां देखो ‘दिसम्बर’ पर ‘दिगम्बर’ भेष भारी है।
,#हजार बार
#नमन ऐसी #तपस्या को … 🙏 #जय_जय_गुरुदेव 🙏🙏
#लोक के सभी
#दिगम्बर
#साधुओं को मेरा
#नमस्कार हों!🙏
रवि जैन (सतभैया)
