सर्वतोभद्र जिनालय बनने से यह तीर्थ नहीं बल्कि अब महातीर्थ बन गया है। मुनि श्री
सागर
भाग्योदय तीर्थ सागर पर धर्म सभा को पूज्य मुनि श्री निरोग सागर महाराज ने सागर नगर को संतो का जंक्शन कहा उन्होने कहा यहाँ से निकलना और रुकना ही पड़ता है उन्होने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की 30 वर्ष पूर्व की दूरगामी सोच को बताया उन्होने कहा आज से 30 वर्ष पहले भाग्योदय तीर्थ कीस्थापना हुई थी। उस समय लोगों
ने कहा था कि बनना अस्पताल है लेकिन तीर्थ क्यों लिखा जा रहा है। उन्होने भाग्योदय तीर्थ की व्याख्या करते हुए कहा और जमकर सराहना करते हुए कहा की चिकित्सा के लिये सागर का नाम समस्त बुंदेलखंड मे जाने जाना लगा है
भाग्योदय तीर्थ पर बहुत वर्गणाएं हैं
पूज्य मुनि श्री ने पुरानी स्मृति को जिक्र करते हुए कहा की इस तीर्थ पर बहुत वर्गणाएं हैं इस विषय पर बोलते हुए उन्होने कहा की आचार्य भगवन्त कुछ वर्ष पूर्व खुरई मे अस्वथ्य थे लेकिन जेसे ही उन्होने जेसे ही उन्होने इस तीर्थ की और विहार किया इस पावन भूमि पर आकर स्वस्थ हो गए जब उन्होने एक माह बाद मंगल विहार किया तो सीधे 19
किलोमीटर पैदल महज 4 घंटे में चले। उन्होने सागर के भक्तो की जमकर तारीफ़ की और कहा की सागर के लोग चारो प्रकार का दानदेने में दक्ष हो गए हैं।
निर्यापक मुनि संभव सागर महाराज ने कहा कि एक बार प्रसिद्ध नाड़ी रोग विशेषज्ञ ने कहाथा कि सागर का मरीज जब भाग्योदयपहुंचता है तब 25% वर्गणाओं सेठीक हो जाता है। आने वाले 3-4वर्षों में मंदिर का निर्माण पूर्ण हो जाएगा।गुरुदेव के कर कमलों से हीइसकी प्राण प्रतिष्ठा होगी। मुनि सेवासमिति के सदस्य मुकेश जैन ढानाने बताया कि मंगलवार को मुनि संघऔर आर्यिका गुरुमति माताजी कामोराजी में मंगल प्रवेश होगा। यहीं
पर दोनों संघों की आहारचर्या होगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
